जिला में कोरोना की पहली लहर मार्च 2020 में आई थी। इस समय तक टीका बना नहीं हुआ था, जिससे जिला में 1958 लोग कोरोना की चपेट में आ गए। टीका न लगने का असर दूसरी लहर में भी रहा।
कोरोना की लहर बार-बार आ रही है। कोरोना की तीसरी लहर के कमजोर रहने के पीछे टीकाकरण को अहम कारण माना जा रहा है। ऐसे में यदि बच्चों को टीका नहीं लगवाया तो उनके लिए खतरा बढ़ सकता है।
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जिला में कोरोना की पहली लहर मार्च 2020 में आई थी। इस समय तक टीका बना नहीं हुआ था, जिससे जिला में 1958 लोग कोरोना की चपेट में आ गए। टीका न लगने का असर दूसरी लहर में भी रहा। इस लहर में 2292 लोग कोरोना की चपेट में आए और 132 लोगों की जान चली गई। काफी दिनों तक इस लहर का असर बना रहा। लेकिन इस लहर के बाद टीकाकरण अभियान शुरू हो गया।
लोगों ने भी तेजी से टीके लगवाए। जिसका असर तीसरी लहर में देखने को मिला। इस लहर में जिला में मात्र 672 लोग ही कोरोना की चपेट में आए। सरकार द्वारा कोरोना की चपेट में आने से बचाने के लिए इस समय 12 से 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों को कोरोना का टीका लगाया जा रहा है, लेकिन बच्चों के टीकाकरण में अभी अपेक्षाकृत सफलता नहीं मिल पा रही, जिससे चौथी लहर आने पर बच्चों के लिए खतरा हो सकता है।
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यूरोपीय देशों और चीन में कोरोना तेजी से फैल रहा है। ऐसे में चौथी लहर का खतरा बना हुआ है। टीकाकरण के माध्यम से ही कोरोना का खतरा कम हो सकता है। - डा. अनिल कुमार सीएमओ
बच्चों को कोरोना का टीकाकरण की रफ्तार अभी काफी धीमी चल रही है। बच्चों को टीका लगाने के लिए सरकारी स्कूलों में टीके लगवाने शुरू कर दिए हैं।- डा. अंजुश, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी