कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके मरीजों के प्लाज्मा में एंटीबॉडी की जांच होने के बाद ही संक्रमित मरीज को डोज दी जाएगी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की नई गाइड लाइन के बाद प्लाज्मा की जांच अनिवार्य हो गई है। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज को दान में मिलने वाले प्लाज्मा की जांच नोएडा स्थित सेंटर में की जाएगी।
एसएन मेडिकल कॉलेज में 51 साल के संक्रमित मरीज पर प्लाज्मा थेरेपी कारगर साबित हुई है। अभी एक और महिला का इसी थेरेपी से इलाज चल रहा है। चार मरीजों के इलाज के लिए कॉलेज प्रशासन ने आईसीएमआर से अनुमति मांगी है। अब इन मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी से पहले उसकी गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता की जांच करने के बाद ही दिया जाएगा। इससे मरीज में ठीक होने की प्रतिशत का आकलन किया जा सकेगा। अभी एसएन से दो लोगों के प्लाज्मा की जांच के लिए नमूना आईसीएमआर भेज दिए गए हैं।
प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि आईसीएमआर यह जांच कर रहा है कि संक्रमण से ठीक हो चुके मरीज के प्लाज्मा में एंटीबॉडीज विकसित हुई है, इसका सही आकलन आने के बाद संक्रमित मरीज के इलाज में और बेहतर परिणाम सामने आएंगे।