आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) में रेमडेसिविर इंजेक्शन से कोरोना वायरस के संक्रमण की गंभीर मरीज पर कारगर असर हुआ है। इलाज के बाद मरीज घर जा चुकी है। दो और मरीजों को यह इंजेक्शन दिया जा रहा है। एसएन मेडिकल कॉलेज में इस दवा का पहली बार प्रयोग किया गया है।
सिकंदरा के महर्षिपुरम निवासी 45 साल की महिला 28 जून को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती हुई थी। इसके दोनों फेफड़ों में निमोनिया था और सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी। इसे एनेस्थीसिया चिकित्सकों की निगरानी में आईसीयू में भर्ती किया गया। यहां 10 दिन तक भर्ती रही।
लगातार पांच दिन तक लगाया गया इंजेक्शन
मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगातार पांच दिन तक चला। इसके बाद हालत में सुधार हुआ और 10 दिन बाद आईसीयू से आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया। यह इंजेक्शन दो और मरीजों को दिया जा रहा है। इसके अलावा फेविपिराविर दवा भी दो मरीजों को ट्रायल के तौर पर दी जा रही है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने बताया कि ये दोनों ही एंटी वायरल दवाएं हैं। प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की गाइडलाइन के मुताबिक कोरोना मरीजों पर मलेरियारोधी के अलावा अन्य दवा-इंजेक्शन का उपयोग कर रहे हैं, इससे बेहतर परिणाम सामने आए हैं।
प्लाज्मा थेरेपी से भी चल रहा इलाज
एसएन मेडिकल कॉलेज में संक्रमित मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी भी दी जा रही है। इसका प्रयोग भी पहली बार हुआ है। इसकी डोज देने से 51 साल के संक्रमित मरीज की हालत में काफी सुधार हुआ है। ऑक्सीजन की जरूरत आधी रह गई और सांस अच्छी तरह से ले रहे हैं।
एचएफएनसी मशीन से दो मरीजों की बची जान
एसएन मेडिकल कॉलेज को दान में मिली एचएफएनसी मशीन से दो मरीजों की जान बच चुकी है। इस मशीन से एनेस्थीसिया विभाग के चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
कोविड अस्पताल के आईसीयू इंचार्ज डॉ. राजीव पूरी ने बताया कि गंभीर मरीजों का आईसीयू में एनेस्थीसिया के चिकित्सकों की निगरानी में इलाज चल रहा है, अभी तक 160 से अधिक मरीज भर्ती हुए हैं, इसमें से 140 से अधिक ठीक हो गए हैं। एचएफएनसी मशीन से इलाज के बेहतर परिणाम आए हैं। इससे दो मरीजों की जान बच चुकी है।