एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल व जिले की सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), रेलवे स्टेशनों व आईएसबीटी कोरोना की जांच के लिए नमूने लिए जाने की व्यवस्था है।
कोरोना की आहट के बीच स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांचें और सक्रियता बढ़ा दी गई है। विश्वदाय स्मारकों के साथ आगरा कैंट, फोर्ट और राजा की मंडी रेलवे स्टेशनों और अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) पर जांचें हो रही हैं। कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए रैपिड रिस्पांस टीमों (आरआरटी) को सक्रिय कर दिया गया है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव नले बताया कि ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट नीति को दोबारा से प्रभावी करने के लिए निर्देश दे दिए हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल व जिले की सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), रेलवे स्टेशनों व आईएसबीटी कोरोना की जांच के लिए नमूने लिए जाने की व्यवस्था है। पूर्व में गठित निगरानी समितियों को सक्रिय करने के लिए बैठक कर ली गई है। उनको कोरोना से संबंधी पूर्व की तैयारी करने के भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, जिले में 25 नवंबर 2022 से कोई कोरोना का कोई नया मामला सामने नहीं आया है पर सतर्कता जरूरी है।
मास्क जरूर लगाएं, दो गज दूरी का पालन करें
मुख्य चिकित्साधिकारी कहना है कि कोरोना के फिर से फैलने की आशंका व देश में ओमिक्रोन के बीएफ-7 के चार केसों के मिलने से सतर्कता जरूरी है। लोगों को चाहिए कि वह मास्क जरूर लगाएं और दो गज की दूरी का पालन करें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर न जाएं। हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें और सर्दी, खांसी, बुखार जैसे लक्षण दिखते ही जांच कराएं। जिन लोगों ने अभी तक कोरोना वैक्सीनेशन नहीं करवाया है, वह वैक्सीनेशन करवा लें और बूस्टर (सतर्कता) डोज जरूर लगवाएं।
इन नंबरों पर संपर्क कर कर सकते हैं पूछताछ
स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। कोरोना के संबंध इन नंबरों पर पूछताछ की जा सकती है। -0562-2600412 और 9458569043 नंबरों पर फोन करना होगा।
मरीज मिलने पर जीनोम सीक्वेसिंग कराई जाएगी
एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर गोयल का कहना है कि कोरोना के नए मामले सामने आन पर जीनोम सीक्वेंसिंग भी कराई जाएगी। जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए वह नमूने भेजे जाते हैं, जिनकी साइकिल थ्रेसोल्ड (सीटी) वैल्यू 20 से 25 होती है। केजीएमयू, लखनऊ के लैब में जीनोम सीक्वेसिंग की जाती है। इसमें जेनेटिक स्ट्रक्चर से मैपिंग की जाती है। इससे वैरिएंट का पता लग जाता है। अधिक नमूने एकत्रित होने पर एक साथ यह प्रक्रिया हो पाती है। रिपोर्ट आने में 15 दिन से एक माह तक भी लग जाता है। वैरिएंट कोई भी हो मरीज का इलाज शुरू कर दिया जाता है।