मैनपुरी। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के करहल-कट पर सीढ़ियां न होने के मामले में बुधवार को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के अधिशासी अभियंता ने स्थायी लोक अदालत में अपना पक्ष रखा।
अधिशासी अभियंता एसपी सिंह ने अदालत को लिखित जवाब में कहा कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर केवल 18 स्थानों पर ही प्रवेश और निकास की व्यवस्था है। यात्रियों को केवल उन्हीं स्थानों पर बने लूप और रैंप का उपयोग करना होता है। अधिशासी अभियंता ने स्पष्ट किया कि रेलवे ब्रिज पर जो सीढ़ियां बनाई गई हैं, वे आम यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि रेलवे ब्रिज के निरीक्षण के लिए हैं। अन्य जगहों पर सीढ़ियां बनाने का प्रावधान नहीं है। इसके अलावा उन्होंने टोल शुल्क प्रणाली भी बताई।
अदालत की टिप्पणी
अधिवक्ता देवेंद्र सिंह कटारिया ने स्थायी लोक अदालत में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर करहल-कट पर सीढ़ियां न होने से यात्रियों को परेशानी होती है, जबकि अन्य जगहों पर सीढ़ियां बनी हुई हैं। उन्होंने तर्क दिया कि करहल-कट मैनपुरी और इटावा को जोड़ता है और यहां से सैफई मेडिकल कॉलेज जाने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी दिक्कत होती है। इसी मामले में यह सफाई यूपीडा ने पेश की।
अदालत ने कहा-अधिवक्ता के माध्यम से रखें सफाई
स्थायी लोक अदालत के न्यायाधीश श्याम कुमार ने यूपीडा के अधिशासी अभियंता को बताया कि इस मामले में एकतरफा कार्रवाई का आदेश पहले ही दिया जा चुका है और उन्हें अब किसी अधिवक्ता के माध्यम से ही अपना पक्ष रखना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अगस्त की तारीख तय की गई है।