आगरा के एसएन मेडिकल काॅलेज में उपचार कराने पहुंच रहे मरीजों को अव्यवस्थाओं से गुजरना पड़ रहा है। एक रुपये के पर्चे से शुरू होने वाला इलाज बाहरी दवाओं के चलते हजारों रुपये पर पहुंच जाता है। मरीजों का आरोप है कि मेडिकल काॅलेज में पर्चे पर लिखी दवाएं या तो अधूरी मिलती हैं, या फिर बाहर मेडिकल स्टोर से काफी महंगी खरीदनी पड़ रही हैं। मेडिकल काॅलेज में शुक्रवार को ओपीडी में 2642 मरीजों का उपचार किया गया, जिनमें अधिकांश को खांसी, जुकाम, बुखार, पेट दर्द, शारीरिक पीड़ा और त्वचा संबंधी समस्याएं थीं।
ओपीडी पंजीकरण केंद्र पर रक्त जांच केंद्र पर मरीजों की लंबी कतार देखी गई। एक रुपये में पर्चा बनवाकर इलाज तो हो रहा है, पर मरीजों की शिकायत रही कि आधी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। बेलनगंज से त्वचा रोग का इलाज कराने आए विवेक कुमार ने बताया कि 10 दवाएं लिखी गईं हैं जिनमें से केवल तीन ही उपलब्ध हैं। बाकी बाहर से खरीदनी पड़ीं, जो 1613 रुपये में मिलीं। ऐसे में एक रुपये में सरकारी उपचार की बातें बेमानी साबित हो रही हैं। पेट दर्द समस्या से ग्रस्त कुबेरपुर के रवींद्र सिंह ने बताया कि 15 दिनों से इलाज चल रहा है। दवाएं तो पांच दिन के हिसाब से लिखी जाती हैं, लेकिन पूरी मिलती नहीं हैं। ऐसे में इलाज अधूरा ही रह जाता है।
दवा का कोर्स कैसे पूरा हो
मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि बदलते मौसम में बुखार, खांसी, पेट दर्द आदि के मरीज बढ़ गए हैं।
इन ओपीडी में रही अधिक संख्या
मेडिसिन ओपीडी- 459
ऑर्थोपेडिक ओपीडी- 272
त्वचा रोगी- 212
ईएनटी ओपीडी- 203