एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और लेडी लॉयल में सोमवार को 8,100 मरीज पहुंचे। इससे व्यवस्थाएं चरमरा गईं, सबसे बुरा हाल लेडी लॉयल का रहा। यहां पंखे बंद होने से गर्भवती महिलाओं की गर्मी और उमस से हालत बिगड़ गई।
आगरा के एसएन, जिला अस्पताल और लेडी लायल में ओपीडी में 8095 मरीज पहुंचे। भीषण गर्मी में इन अस्पतालों की व्यवस्थाएं चरमरा गईं। लेडी लॉयल में तो पंखे बंद हो गए, जिससे गर्भवती महिलाओं की गर्मी और उमस से हालत बिगड़ गई। लेडी लॉयल में सोमवार को 549 मरीज ओपीडी में पहुंचे। ओपीडी के अंदर 60 मरीजों के बैठने की ही व्यवस्था है, बाकी के मरीज टिन शेड के नीचे इंतजार करते रहे। यहां लगा पंखा खराब होने से गर्मी-उमस से मरीजों की हालत खराब होने लगी। मरीजों को एक से डेढ़ घंटे तक कतार में खड़े रहना पड़ा। हालत खराब होने पर कई मरीज जमीन पर ही बैठ गईं। इनमें से इस्लाम नगर की साजिया खान, मलपुरा की ममता और जीवनी मंडी की रेखा को चक्कर आने लगे। इनको परिजनों ने दवा काउंटर के बेंच पर लिटाया।
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लेडी लॉयल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पंकज कुमार का कहना है कि पंखे क्यों नहीं चले, इसे दिखवाता हूं। ओपीडी के अंदर बेंच की संख्या बढ़ाई जाएगी।
एसएन-लेडी लॉयल में ठसाठस भरा हॉल
एसएन मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ओपीडी का हॉल सोमवार को ठसाठस भर गया। घंटे भर में पर्चा बन पाया। गर्मी-उमस से लोग परेशान हो गए। एसएन में 2,591 मरीज आए। सबसे ज्यादा मेडिसिन विभाग, त्वचा रोग और हड्डी रोग विभाग पर भीड़ रही। इनमें कुल 1,151 मरीज आए। जिला अस्पताल में 4,989 मरीज आने से साइकिल स्टेंड तक मरीजों की कतार लग गई। जल्दी पर्चा बनवाने के लिए मरीजों में धक्कामुक्की होने लगी। गार्ड ने सभी को लाइन में लगवाकर व्यवस्था संभाली। एसएन के ओपीडी प्रभारी डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि सोमवार को अन्य दिनों के मुकाबले डेढ़ गुना मरीज आते हैं। इससे सुबह 10 से 12 बजे तक भीड़ अधिक रहती है।
उल्टी-दस्त और एलर्जी के ज्यादा मरीज
एसएन के प्रमुख अधीक्षक डॉ. बृजेश शर्मा ने बताया कि मेडिसिन और बाल रोग विभाग में लू, डिहाइड्रेशन, फूड प्वाइजनिंग, अपच, उल्टी-दस्त और पीलिया के मरीज सबसे ज्यादा रहे। ओपीडी में में आए मरीजों में से इनकी संख्या 70 फीसदी रही। इनमें से 18-20 मरीजों को भर्ती करना पड़ा। त्वचा रोग विभाग में खुजली, सन बर्न, लाल चकत्ते, जलन और त्वचा एलर्जी की परेशानी वाले मरीज अधिक हैं।