यूपी के आगरा जिले में बुधवार को ताज महोत्सव का रंगारंग शुभारंभ हो गया। 27 फरवरी तक आयोजित इस महोत्सव में शिल्प, कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। लेकिन पहले दिन ही महोत्सव में बारिश से खलल पड़ गया।
ताज महोत्सव के आगाज पर ही कुदरत की मार और प्रशासनिक बदइंतजामी भारी पड़ गई। पहले ही दिन बारिश ने इंतजामों पर पानी फेर दिया। यूपी के रंग कार्यक्रम भी बारिश से धुल गया। अव्यवस्थाओं के बीच फंसे शिल्पी व्यवस्थाओं को कोसते नजर आए। रात में तेज बारिश ने आयोजन के दावों की पोल खोलकर रख दी। 25 एकड़ के मैदान में खुले आसमान के नीचे बैठे शिल्पियों का फर्नीचर, कालीन और अन्य बेशकीमती उत्पाद बारिश की भेंट चढ़ गए। हालत यह रही कि उद्घाटन के बाद होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम यूपी के रंग की महज एक प्रस्तुति हो सकी और बाकी कार्यक्रम रद्द करने पड़े।
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100 से अधिक कलाकार हुए निराश, प्रस्तुतियां रद्द
बारिश और मौसम के बिगड़ते मिजाज को देखते हुए जिलाधिकारी अरविंद एम बंगारी ने सुरक्षा के लिहाज से मुक्ताकाशीय मंच से बाकी प्रस्तुतियों को रोकने के निर्देश दिए। इससे अपनी कला का प्रदर्शन करने आए 100 से अधिक कलाकार बिना प्रस्तुति दिए ही निराश होकर लौट गए। टाटा मैदान में महोत्सव स्थल पर कई जगह बिजली के तार खुले पड़े थे, जिससे बारिश के दौरान करंट उतरने का खतरा बना रहा। आकर्षक विद्युत सजावट भी अंधेरे में डूबी रही।
खुले में दुकानें, लाखों का माल हुआ खराब
इंतजामों की लापरवाही का सबसे ज्यादा खामियाजा कालीन और फर्नीचर शिल्पकारों को भुगतना पड़ा। खुले मैदान में स्टॉल दिए जाने से कालीन पूरी तरह भीग गए। विक्रेताओं का कहना है कि प्रशासन ने पर्याप्त कवर्ड एरिया नहीं दिया, जिससे उनका महंगा माल खराब हो गया। सहारनपुर से आए फर्नीचर कारोबारियों ने बताया कि 15x20 वर्ग फुट की जगह उनके उत्पादों के लिए बेहद कम है। जगह की कमी और बारिश के डर से लगभग 30 फर्नीचर दुकानों का सामान अब भी पैक पड़ा है। शिल्पी हाथ पर हाथ धरे खाली बैठने को मजबूर हैं।
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सुरक्षित शेड की उठाई मांग
मेला मैदान में 500 से अधिक स्टॉल लगाए जाने हैं, लेकिन पहले ही दिन की अव्यवस्था ने शिल्पियों के भरोसे को तोड़ दिया है। शिल्पियों ने मांग की है कि कालीन और फर्नीचर जैसे संवेदनशील उत्पादों के लिए तत्काल वॉटरप्रूफिंग और सुरक्षित शेड की व्यवस्था की जाए। साथ ही, दुकानों के आवंटन की विसंगतियों को भी दूर किया जाए।