आगरा। भीषण सर्दी से बच्चों की हालत खराब है। सर्दी लगने से हाथ-पैर सुन्न पड़ रहे हैं। इलाज में देरी करने से निमोनिया हो रहा है। इनमें तेज सांस और पसली चलने पर बच्चों को अस्पताल में भर्ती भी करना पड़ रहा है। अन्य बच्चों को वायरल बुखार अधिक मिल रहा है।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि बीते दो सप्ताह से गलन भरी सर्दी हो रही है। इसमें बच्चों के हाथ-पैर और कान ठंडे पड़ने से निमोनिया हो रहा है। ऐसे बच्चों की संख्या फिर से बढ़ गई है। तेज सांस चलने, पसली चलने, शरीर नीला पड़ने वाले बच्चों को भर्ती कर रहे हैं। अन्य बच्चों के तेज बुखार, गले में खराश, खांसी-जुकाम की परेशानी मिल रही है। अस्थमा पीड़ित बच्चों की प्रदूषण से सांस फूल रही है। इंडियन पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अरुण जैन ने बताया कि बच्चों में सांस चलने, घर्र-घर्र की आवाज आने और सीने में जकड़न मिल रही है। बच्चों को भाप देनी पड़ रही है। हालत खराब मिलने पर बच्चों को भर्ती भी कर रहे हैं।
इलाज के लिए धक्कामुक्की, मरीजों को हुई परेशानी
- एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में सोमवार को 3525 मरीज आए। इसमें 2843 नए और 682 पुराने मरीज रहे। इनमें सबसे ज्यादा बुखार-खांसी, जोड़-मांसपेशियों में दर्द, त्वचा की एलर्जी और अस्थमा-सांस के मरीज आए। मरीजों की भीड़ के कारण हॉल ठसाठस भर गया। सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक मारामारी रही। पर्चा, दवा और जांच के लिए दो से तीन घंटे तक समय लगा। टेढ़ी बगिया निवासी तेजपाल सिंह ने बताया कि मां के घुटनों में सूजन होने पर दिखाने गया। पर्चा बनवाने, डॉक्टर को दिखाने और फिर दवा लेने में दो से तीन घंटे लग गए। भीड़ अधिक होने पर पिताजी को बेंच पर बिठाकर खुद लाइन में लगा।
इन बातों का रखें ध्यान:
- बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं, हाथ-पैर, कान और सिर जरूर ढकें।
- लकड़ी जलाकर हाथ न सेकें, इलेक्ट्रिक हीटर का इस्तेमाल करें।
- समारोह में आइसक्रीम-ठंडी सामग्री खिलाने-पिलाने से बचाएं।