अधिकारी करते हैं कर्मचारियों का शोषण
लिपिक मनोज श्रीवास्तव ने सुसाइट नोट में लिखा कि हर पत्रावली पर हस्ताक्षर के लिए 1000 रुपये सोबरन सिंह और 2000 रुपये कर निर्धारण अधिकारी मांगते हैं। इस वजह से पत्रावलियों में देरी होती है। उन्होंने नगर आयुक्त को संबोधित पत्र में कहा है कि उनके पास टैक्स की 20 पत्रावलियां संजय गुप्ता के जरिए आई थीं। इनमें से चार अब भी उनके पास हैं। उन पर 5000 रुपये की रिश्वत मांगने के गलत आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने दोनों अधिकारियों पर कर्मचारियों का शोषण करने की लिखी है। कहा कि संभव है कि कोई अन्य कर्मचारी न बोले।
यह आत्महत्या नहीं, मर्डर होगा
मनोज श्रीवास्तव ने पत्र को आत्महत्या (मर्डर) पत्र करार दिया है। उन्होंने लिखा है कि मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। यह आत्महत्या नहीं, बल्कि मर्डर होगा। इसके लिए व्यक्तिगत रूप से सुभाष चंद्र भारती और कर निर्धारण अधीक्षक सोबरन सिंह जिम्मेदार होंगे।
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