फास्ट-जंक फूड से पनपता है नया स्वाद
आईपीए के आगरा शाखा के अध्यक्ष डॉ. संजय सक्सेना ने बताया कि जीभ की ऊपरी सतह पर लाल दाने के रूप में स्वाद कलिकाएं होती हैं। लार के जरिये ये खट्टा, मीठा, कड़वा और नमकीन स्वाद बताती हैं। फास्ट-जंक फूड में अजीनोमोटो समेत अन्य रसायन होते हैं, इनके खाने-पीने से जीभ में इनके प्रति नया स्वाद पनपता है। ऐसी स्थिति में बच्चों को दाल, हरी सब्जी समेत पौष्टिक आहार अच्छा नहीं लगता।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल चतुर्वेदी ने बताया कि नूडल्स, पेटीज, चिप्स समेत अन्य फास्ट फूड में नमक, रंग समेत अन्य तत्वों की मात्रा कई गुना होती है। इनके लंबे समय तक खाने से बच्चों में भविष्य में उच्च रक्तचाप, मधुमेह का खतरा सात गुना तक बढ़ जाता है। किडनी-लिवर की क्षमता भी प्रभावित होती है। मैदा और ट्रांसफैट होने से बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ता है।
वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि बच्चों को जब पसंदीदा फास्ट फूड नहीं मिलते तो उनमें गुस्सा करना, खाना फेंक देना, सामान फेंकना, जोर-जोर से चिल्लाना जैसे विकार पनपने लगते हैं। ऐसा होने पर परिजन फास्ट फूड उपलब्ध करा देते हैं। इससे बच्चे में विकार और बढ़ जाते हैं। उनकी ओपीडी में रोजाना दो से तीन मामले ऐसे आते हैं, जिसमें अभिभावक बच्चे की यह परेशानी बताते हैं।
ये है सलाह
- स्कूलों की कैंटीन में फास्ट फूड प्रतिबंधित हो, कक्षाओं में फास्ट फूड के दुष्प्रभाव भी बताए जाएं।
- छह माह से बड़े बच्चों को घर में बनी पौष्टिक सामग्री खिलाने की आदत डालें।
- हरी सब्जी, सलाद और रोटी से घर में बच्चों के लिए पसंदीदा खाद्य सामग्री बनाएं।
- अभिभावक खुद भी बच्चों के सामने फास्ट फूड और पैकेट बंद खाने से बचें।