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Fast Food Effects: चाऊमीन और बर्गर से बदला स्वाद, बच्चों को नहीं भा रही दाल-रोटी

Thu, 30 Jun 2022 01:57 AM IST
आगरा ब्यूरो धर्मेंद त्यागी, अमर उजाला आगरा

सार

बच्चों की फास्ट-जंक फूड की जिद के साथ उनको हो रही पेट दर्द, मोटापा, अपच परेशानी भी अभिभावकों को परेशान कर रही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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बच्चों की चाऊमीन, बर्गर और पेटीज की लत अब मम्मी-पापा के लिए सिरदर्द साबित हो रही है। लंबे वक्त तक इन्हें खाने से बच्चों की जीभ का स्वाद बदल रहा है, उन्हें दाल-रोटी नहीं भा रही। बच्चों की फास्ट-जंक फूड की जिद के साथ उनको हो रही पेट दर्द, मोटापा, अपच परेशानी भी अभिभावकों को परेशान कर रही है। इंडियन पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन (आईपीए) की आगरा शाखा के अध्ययन में 82 फीसदी बच्चे फास्ट फूड के लती मिले। इनमें से 64 फीसदी बच्चे सप्ताह में तीन से पांच दिन फास्ट फूड से ही पेट भरते हैं।
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आईपीए के उपाध्यक्ष डॉ. अरुण जैन ने बताया कि विशेषज्ञों के पास ओपीडी में आने वाले 1190 बच्चों का अध्ययन किया गया। इनकी उम्र पांच से 12 साल थी। ये मध्यम और संपन्न वर्ग के थे। पेट में दर्द, उल्टी-दस्त, पीलिया, अपच, हीमोग्लोबिन कम होने, पेट में अल्सर की तकलीफ होने पर दिखाने आए थे।

अभिभावकों से पूछताछ में पता लगा कि 974 बच्चे पैकेट बंद और फास्ट फूड खाते थे। इनमें से 762 बच्चे तो सप्ताह में तीन से पांच दिन इसी से पेट भरते थे। घर में बनी दाल, हरी सब्जी नहीं खाते। परिजनों ने बताया कि बच्चे थोड़ा बहुत खाकर ‘अच्छा नहीं लग रहा’ कहते हैं और खाना छोड़कर फास्ट फूड की मांग करते हैं। मना करने पर जिद और गुस्सा करते हैं। पौष्टिक आहार की कमी से ऐसे बच्चों का शारीरिक विकास भी पिछड़ गया है।
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 फास्ट-जंक फूड से पनपता है नया स्वाद

आईपीए के आगरा शाखा के अध्यक्ष डॉ. संजय सक्सेना ने बताया कि जीभ की ऊपरी सतह पर लाल दाने के रूप में स्वाद कलिकाएं होती हैं। लार के जरिये ये खट्टा, मीठा, कड़वा और नमकीन स्वाद बताती हैं। फास्ट-जंक फूड में अजीनोमोटो समेत अन्य रसायन होते हैं, इनके खाने-पीने से जीभ में इनके प्रति नया स्वाद पनपता है। ऐसी स्थिति में बच्चों को दाल, हरी सब्जी समेत पौष्टिक आहार अच्छा नहीं लगता।

वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल चतुर्वेदी ने बताया कि नूडल्स, पेटीज, चिप्स समेत अन्य फास्ट फूड में नमक, रंग समेत अन्य तत्वों की मात्रा कई गुना होती है। इनके लंबे समय तक खाने से बच्चों में भविष्य में उच्च रक्तचाप, मधुमेह का खतरा सात गुना तक बढ़ जाता है। किडनी-लिवर की क्षमता भी प्रभावित होती है। मैदा और ट्रांसफैट होने से बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ता है।

वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि बच्चों को जब पसंदीदा फास्ट फूड नहीं मिलते तो उनमें गुस्सा करना, खाना फेंक देना, सामान फेंकना, जोर-जोर से चिल्लाना जैसे विकार पनपने लगते हैं। ऐसा होने पर परिजन फास्ट फूड उपलब्ध करा देते हैं। इससे बच्चे में विकार और बढ़ जाते हैं। उनकी ओपीडी में रोजाना दो से तीन मामले ऐसे आते हैं, जिसमें अभिभावक बच्चे की यह परेशानी बताते हैं।

ये है सलाह

- स्कूलों की कैंटीन में फास्ट फूड प्रतिबंधित हो, कक्षाओं में फास्ट फूड के दुष्प्रभाव भी बताए जाएं।
- छह माह से बड़े बच्चों को घर में बनी पौष्टिक सामग्री खिलाने की आदत डालें।
- हरी सब्जी, सलाद और रोटी से घर में बच्चों के लिए पसंदीदा खाद्य सामग्री बनाएं।
- अभिभावक खुद भी बच्चों के सामने फास्ट फूड और पैकेट बंद खाने से बचें।
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