बता दें कि भारतीय ग्रे लंगूर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची IIके तहत संरक्षित है। इसे बेचा, खरीदा, व्यापार या किराए पर नहीं लिया जा सकता है। इसका उल्लंघन करने पर जुर्माना या तीन साल की जेल या दोनों की सजा का भी प्रावधान है। संस्था ने बताया कि लंगूर वर्तमान में चिकित्सकीय निगरानी में है। फिट होने पर उसे उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया जाएगा।
मादा लंगूर की हालत गंभीर
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी ने कहा कि मादा लंगूर की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है। हमारी टीम उसकी देखभाल में जुटी है, ताकि उसके पास वह सब कुछ हो जिसकी उसे जरुरत है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि यह महज एक मिथक है कि बंदर लंगूरों से डरते हैं। लंबे समय से शहरी क्षेत्रों में बंदरों की बढ़ती आबादी से निपटने के लिए लोगों द्वारा लंगूरों का दुरुपयोग किया जाता रहा है। जिसके कारण इन लंगूरों को क्रूर परिस्थितियों में रखा जाता है। यह जरूरी है की लोगों में इस भ्रम और लंगूरों को लेकर जागरूकता फैलाई जाए और उन्हें शिक्षित किया जाए।