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छठ पर्व: डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, ईख का मंडप बनाकर अर्पित किए ठेकुआ, यमुना घाट पर उमड़ी भीड़

Thu, 11 Nov 2021 09:07 AM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

छठ पर्व पर बुधवार शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया। गुरुवार को सूर्योदय पर अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद व्रत संपन्न होगा।
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आगरा में छठ पर्व पर उमड़े श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छठ पर्व के तीसरे दिन सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए यमुना के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी। कोई दंडवत करते तो कोई सिर पर प्रसाद की टोकरी रखे नंगे पैर घाट पर पहुंचा। विधि-विधान से छठी मैया की पूजा की। यमुना में डुबकी लगाई और अस्ताचलगामी (डूबते हुए) सूर्य को अर्घ्य दिया। पूजन के साथ गीतों ‘पटना के हवीं पाटन देवी, आगरा अइसन घाट, उतरले सूरज देव भइले अरघिया के जून...’, ‘पूजेली चरण तोहार हे छठी मइया’ आदि के जरिये छठ मैया के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

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बल्केश्वर, रामबाग, कैलाश, हाथीघाट और दशहरा घाट पर व्रती महिलाएं शाम साढ़े तीन-चार बजे से पहुंचने लगे। इनके साथ बच्चे और परिवार के बाकी लोग भी थे। इन्होंने पूजन में सहयोग किया। घाट पर वेदी बनाकर पूजा की गई। यमुना मैया की गोद में खड़ी, मांग से लेकर पूरी नाक तक सिंदूर लगाए महिलाओं के चेहरे से तेज झलक रहा था। भीगे वस्त्र में और हाथों में फल पकवानों से लदी टोकरी के साथ व्रती सूर्य देव की आराधना कर रही थीं। अंत में सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने पुत्र की प्राप्ति, पति की दीर्घायु, रोगों से मुक्ति और परिवार में सुख शांति की कामना की।
ढोल-नगाड़ों की धुन पर नृत्य किया
व्रती महिलाओं के साथ घाट पर पहुंचे बच्चों और परिवार के लोगों ने ढोल-नगाड़ों की धुन पर डांस किया और आतिशबाजी कर अपनी खुशी व्यक्त की। बच्चों ने आतिशबाजी भी की। 
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यमुना मैया की आरती की गई
आगरा में रामबाग घाट, बल्केश्वर, कैलाश, हाथीघाट पर पर दीपकों से यमुना की आरती की गई। बल्केश्वर पर पंडित वाईके शर्मा ने आरती कराई। यहां मुन्नालाल मिश्रा, अखिलेश सिंह, ओमप्रकाश गुप्ता, ओपी रॉय, अशोक चौबे आदि मौजूद रहे।
घर में भी भरी गई कोसी
घाटों पर पूजन संपन्न होने के बाद महिलाएं घर में लेपन के लिए नदी का जल और मिट्टी अपने साथ ले गईं। घर में भी कोसी भरकर पूजा की गई। रात जागकर व्रतियों ने छठी मैया के गीत गाए। रविवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं व्रत खोलेंगी। सुबह चार बजे व्रती यमुना के घाटों पहुंच जाएंगी।
प्रसाद के रूप में ये चढ़ाया गया
ठेकुआ, फलों में केला, नारियल, पपीता, सेब, अनार, सिंघाड़ा, संतरा, नीबू, सब्जियों में अदरक, कद्दू, मूली आदि के साथ पान, सुपारी, मेवा, गाय के दूध से अर्घ्यदान दिया गया।
घर और मोहल्ले में जलाशय बनाकर पूजा की 
यमुना के घाटों के अलावा कुछ श्रद्धालुओं ने घरों में और मोहल्ले में जलाशय बनाकर छठी मैया की पूजा की। पूर्वांचल सांस्कृतिक सेवा समिति के अध्यक्ष शंभूनाथ चौबे ने घर की छत पर पूजा की। यमुना में प्रदूषण की वजह से यह घर पर ही पूजा करते हैं। समिति के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौबे, रवि चौबे, ज्योतिषाचार्य गोविंद दुबे सहित करीब 15 परिवारों ने गिरीश्वर महादेव मंदिर, नामनेर में कृत्रिम जलाशय के पास पूजन किया। 
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