अफ्रीका और एशियाई देशों से आते हैं भारत
डॉ. केपी सिंह ने बताया कि जैकोबिन कूको को ही चातक बोला जाता है। इसके अन्य नाम पाइड कूको व कूको भी हैं। यह अफ्रीका और दक्षिण एशियाई देशों में भारत, श्रीलंका व म्यांमार का प्रजनक निवासी है। पूर्वी अफ्रीका से भारत में प्रवास पर आते समय सऊदी अरब इनके माइग्रेशन पाथ में शामिल है। अफ्रीकी प्रजाति सर्दियों में अफ्रीका के अन्य देशों में प्रवास पर जाती है। इसे उत्तरी व मध्य भारत में गर्मियों में मानसून पूर्व प्रवास पर देखा जाता है। इसका ऊपरी हिस्सा काले रंग का और नीचे का हिस्सा सफेद रंग का होता है। सिर पर क्रिस्ट से इसे आसानी से पहचाना जा सकता है। चातक के भोजन में कैटरपिलर, कीड़े व फल शामिल हैं।
चातक के माइग्रेशन का किया जा रहा अध्ययन
डॉ. केपी सिंह ने बताया कि इंडियन इंस्टीट्यूट आफ रिमोट सेंसिंग व भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सहयोग से भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून ने चातक पक्षी के माइग्रेशन का अध्ययन जून 2020 से प्रारंभ किया है। सेटेलाइट ट्रांसमीटर की टैगिंग से माइग्रेशन और पर्यावरण परिवर्तन के जैकोबिन कूको पर प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है।
उत्तर भारत में यह पक्षी मानसून से पहले ही देखा जाता है इसकी ब्रीडिंग भी चिह्नित की जाती है। दक्षिण भारत में यह पूरे वर्ष दिखाई देता है। 2017-18 में ई-बर्ड से प्राप्त डाटा के अध्ययन में यह तो ज्ञात हो चुका है कि उच्च जलवाष्प की मात्रा में वृद्धि (जो कि मानसून का सूचक है ) के साथ उत्तर भारत में चातक की संख्या में वृद्धि हो जाती है।
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