आगरा। फिरोजाबाद के थाना खैरगढ़ स्थित गांव शेखपुरा में 5 साल पहले जहरीली शराब से 4 लोगों की माैत हो गई थी। इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक, आबकारी निरीक्षक, बीट के दरोगा और सिपाही के खिलाफ आरोपपत्र लगा दिया गया है। दो साल पहले विजिलेंस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। साक्ष्य संकलन के बाद आरोप पत्र लगा है। तीन आरोपियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी चल रहा है। इस पर भी जल्द कार्रवाई हो सकती है।
पहली घटना 14 नवंबर 2020 को हुई। दिवाली के दिन कमलेश नामक व्यक्ति की मृत्यु हुई। उन्होंने 13 नवंबर को शराब पी थी। अगले दिन मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद भी अवैध शराब बेचने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई। इसका नतीजा यह हुआ कि तीन दिन बाद 17 नवंबर को तीन और लोगों की जान चली गई। इनमें संजू, उसका भतीजा नवीचंद्र और अवधेश शामिल थे। चाचा-भतीजे ने साथ में शराब पी थी। जबकि अवधेश अकेले पीकर आया था। मामले में केस दर्ज हुआ था।
घटना के समय थाना खैरगढ़ में एसएचओ मुस्तकीम अली थे। मामले की शिकायत शासन में की गई। आरोप लगाया गया था कि पुलिस की मिलीभगत से अवैध शराब का खेल चल रहा था। इस पर 6 मार्च 2021 को जांच के आदेश हुए। एसपी विजिलेंस आलोक शर्मा ने बताया कि 5 जून 2023 को जांच आख्या शासन को भेजी गई थी। 13 दिसंबर 2023 को प्राथमिकी दर्ज की गई।
- सीओ ने की थी जांच, शराब माफिया से लेते थे रकम
विजिलेंस के आगरा सेक्टर थाना में निरीक्षक दुष्यंत तिवारी की ओर से दर्ज प्राथमिकी में तत्कालीन एसएचओ मुस्तकीम अली, एसओजी प्रभारी कुलदीप सिंह, बीट उप निरीक्षक विजेन सिंह, बीट आरक्षी संजीव कुमार, आबकारी निरीक्षक तृतीय क्षेत्र जसराना राजकुमार, सिपाही रवींद्र कुमार, भगत सिंह, नदीम खान और राहुल कुमार को नामजद किया गया था। विवेचना सीओ अर्चना गाैतम ने की। विवेचना में पाया गया कि कुलदीप सिंह और उनकी टीम इस क्षेत्र के लिए जिम्मेदार नहीं थी।
इस पर उनके नाम निकाल दिए गए। आरक्षी राहुल की विवेचना के दाैरान मृत्यु हो गई। विवेचक ने क्षेत्रीय लोगों के बयान दर्ज किए। पूर्व में पकड़े गए आरोपियों की काॅल डिटेल निकाली गई। इसमें आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ साक्ष्य मिले। 25 से अधिक लोगों के बयान भी दर्ज हुए। विवेचना में सामने आया कि हर महीने पुलिस को रकम मिलती थी। इससे ही अवैध शराब का धंधा बेधड़क चल रहा था। गांव में सस्ती शराब की सप्लाई माफिया कर रहे थे।
एसपी विजिलेंस ने बताया कि तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक मुस्तकीम अली, बीट उपनिरीक्षक विजेन सिंह, बीट आरक्षी संजीव कुमार और आबकारी निरीक्षक राजकुमार ने अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए पहली घटना और बाद में कोई कार्रवाई नहीं की। शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई की जाती तो तीन और लोगों की मौत की घटना नहीं होती। शराब माफिया से चारों की मिलीभगत के साक्ष्य मिले। उनका यह कृत्य धारा 166 आईपीसी और 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के आरोप सही पाए गए। इस पर चारों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। इन सभी की आय से अधिक संपत्ति की जांच भी चल रही है।
जीआरपी में है मुस्तकीम अली की तैनाती
जहरीली शराब से माैतों के मामले में आरोपी बनाए गए निरीक्षक मुस्तकीम अली की तैनाती जीआरपी में है। वह कासिमपुर खेडी, बागपत के रहने वाले हैं। वहीं आरोपी एसआई विजेन सिंह फर्रुखाबाद, आरक्षी संजीव कुमार हाथरस के रहने वाले हैं। आबकारी निरीक्षक राजकुमार इसी साल जनवरी में सेवानिवृत्त हो गए थे। उनके बारे में विजिलेंस जानकारी जुटा रही है।
आगरा में भी जहरीली शराब ले चुकी है जान
आगरा में भी जहरीली शराब जान ले चुकी है। डाैकी और खंदाैली क्षेत्र में जान गई थीं। मामलों में एफआईआर दर्ज हुए थे। आरोपियों को जेल भेजा गया था। पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरी थी। मगर विजिलेंस जांच नहीं हुई थी।