तेजोमहालय बनाम ताजमहल केस में केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में एक और बयान दिया गया है। इसमें कहा गया है कि ताज के बंद हिस्सों की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी कराने का कोई औचित्य नहीं है।
यह मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया गया मकबरा है। दूसरे पक्ष ने इसके तेजोमहालय होने के संबंध में कोर्ट में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है।
केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता विवेक शर्मा ने कहा कि ताजमहल के संबंध में सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर जारी है। इसके बाद इसके बंद हिस्सों की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी कराए जाने का न तो कोई औचित्य है और न ही यह संभव है।