कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में आगरा मॉडल की प्रशंसा केंद्र सरकार ने की है। इसके पीछे दो वजह हैं। एक तो यहां 10 मरीज संक्रमण से मुक्त हो गए हैं। इनमें से तीन का उपचार यहीं सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएन मेडिकल कॉलेज) में हुआ।
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दूसरा, हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किए गए इलाके में संक्रमण का सफाया कर दिया गया। देश में सबसे पहले हॉटस्पॉट चिन्हित कर उन्हें सील करने का काम भी आगरा में हुआ। हालांकि अभी भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन गनीमत यह है कि संक्रमित मिलने वाले वही लोग हैं, जो पहले से क्वारंटीन में हैं।
संक्रमण से मुक्त इलाके में खंदारी, कमला नगर, सार्थक अस्पताल, मोहनपुर रावली, कृष्णा विहार, जीवनी मंडी शामिल हैं। यहां के मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आई। इन इलाकों को पहले सील किया गया। अब सील हटाई जा रही है। हालांकि निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट तैनात रहेंगे।
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एसएन मेडिकल कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
विदेश से आए लोगों की जांच
प्रशासन ने पहला काम विदेश से आए लोगों की जांच कराकर किया। 336 के सैंपल लिए गए। 11 लोगों में संक्रमण मिला।
जमातियों के संपर्क में आए लोग ट्रेस कराए
दूसरा चैलेंज जमाती के रूप में आया था। दिल्ली से 28 जमाती आए थे। प्रशासन ने पुलिस की मदद से 143 लोगों को ट्रेस किया। इन सभी के सैंपल लिए। 52 पॉजिटिव मिले।
होटलों को बनाया क्वारंटीन सेंटर
मरीजों के संपर्क में आए जो लोग अस्पताल या स्कूलों में बनाए शेल्टर होम में नहीं ठहरना चाहते थे, उनके लिए फाइव स्टार होटल में व्यवस्था की गई। यह बेहद कारगर रही।
संक्रमित क्षेत्रों का नक्शा
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संक्रमित इलाके चिह्नित, नक्शा तैयार किया
प्रदेश और देश में हॉटस्पॉट चिन्हित किए जाने से पहले ही आगरा में 22 इलाकों की सूची बनाकर इन्हें सील कर दिया गया था।
कंट्रोल रूम में 7000 शिकायतें सुनी
कंट्रोल रूम (वार रूम ) स्मार्ट सिटी के दफ्तर में बनाया गया। यहां सात हजार से ज्यादा शिकायतें सुनी गई। इनका निस्तारण किया गया।
घर घर पहुंचाया जरूरत का सामान
प्रशासन ने पूरे शहर के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी कर डोर स्टेप डिलीवरी कराई जा रही है। इसके लिए हर गली-मोहल्ले तक के सब्जीवाले, किराने वालों को हेल्पलाइन से जोड़ा गया है। लोगों को घर पर सामान मिला तो बाहर कम निकले।
जिला अस्पताल में डीएम प्रभु एन सिंह साथ में चिकित्साकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
शेल्टर होम बनाए, जरूरतमंदों को दिया भोजन
गरीबों के लिए शेल्टर होम बनाए। उनके लिए भोजन का प्रबंध किया। समाजसेवी संस्थाओं की मदद से भोजन के पैकेट तैयार कराए। पुलिस के जरिए रोजाना 50 हजार पैकेट तक का वितरण किया।
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बताया कि हमने सबसे अहम काम किया संक्रमित लोगों की पहचान का। अब ज्यादातर मरीज वे ही मिल रहे हैं जो पहले से क्वारंटीन हैं। इससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।
पुलिस के एप से मिली मदद
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बबलू कुमार ने ऐसा एप तैयार कराया, जिससे लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों की पहचान हो सके। इसका नाम दिया गया लॉकडाउन मॉनिट्रिंग एप।
इसे स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रूम से जोड़ा गया। जैसे ही किसी सड़क पर लोग आते हैं, वैसे ही कंट्रोल रूम को पता चलता है। वहां से तुरंत ही संबंधित थाने को वीडियो पहुंच जाता है। थानेदार नक्शे पर देखकर पुलिस भेज देता है।