यदि आपके नाखूनों में पीलापन है या टेढ़े-मेढ़े होकर टूट रहे हैं तो यह फंगल इंफेक्शन हो सकता है। गर्मी और उमस के कारण अस्पतालों में फंगल इंफेक्शन के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज में पसीने से नाखून, जांघ, शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फंगल इंफेक्शन के मामले मरीजों में देखने को मिल रहे हैं। वहीं जिला अस्पताल के चर्म रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना औसत 200 मरीज दाद, खाज खुजली, फंगल इंफेक्शन के आ रहे हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभाग के एचओडी डॉ. यतेंद्र चाहर बताते हैं कि पसीने व गंदगी के कारण नाखूनों में भी फंगल इंफेक्शन हो रहा है, जिसे हम टीनिया यूनगियम कहते है। इसमें नाखूनों का रंग पीला पड़ने लगता है। टीनिया कॉर्पोरिस में त्वचा पर लाल दाने हो जाते हैं। टीनिया क्रूरिस में जांघों पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं और खुजली होने लगती है। ये सारे फंगल इंफेक्शन ही कहलाते हैं।
मधुमेह के मरीज इस मौसम में ज्यादा ध्यान रखें क्योंकि इन्हें जल्दी इंफेक्शन होता है। जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आरए सुधाकर बताते हैं कि फंगल इंफेक्शन एक से दूसरे में फैलता है। गर्मी के कारण पसीना आता है और गंदगी से वैक्टीरिया पनपते हैं, जिससे फंगल इंफेक्शन हो रहा है।
इस तरह करें बचाव
- नाखूनों को साफ रखें रखें।
- शरीर को सूखा रखने के लिए सूती कपड़े पहनें।
- पानी खूब पिएं, धूप में कम निकलें।
- खुजली व लाल चक्कते होने पर डॉक्टर को दिखाएं।
- फंगल इंफेक्शन वाले मरीज के कपड़े, तौलिया इस्तेमाल न करें।