आगरा में उटंगन नदी पर पुल बनाने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में हुई सुनवाई में प्रशासन ने माना है कि श्रीकान्हा इन्फ्रा एस्टेट का रिजॉर्ट नदी से महज 23 मीटर दूरी पर है। प्रशासन ने एनजीटी में दाखिल रिपोर्ट में कहा कि उटंगन नदी का डूब क्षेत्र निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे में नदी पर बने अवैध पुल तोड़ने और उसका मलबा हटाने पर एनजीटी ने रिजॉर्ट मामले को निपटा दिया।
दो मई को अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रशासन समेत पांच विभागों को नोटिस जारी कर उटंगन नदी पर हुए अवैध निर्माण का मामला दर्ज किया था। इस मामले में हुई सुनवाई में डीएम ने रिपोर्ट दाखिल की। इसमें एसडीएम फतेहाबाद ने कहा कि 51 कमरों और 6183 वर्ग मीटर जमीन पर बनाए जा रहे श्री कान्हा इंफ्रा एस्टेट्स के रिसॉर्ट से नदी की दूरी 23 मीटर है।
प्रशासन ने कहा कि नदी पर पहले से पुलिया थी, जिसे विस्तार करते हुए मजबूत किया। इसके लिए कोई एनओसी नहीं ली गई थी। जानकारी मिलने पर बनाए गए अवैध पुल को ध्वस्त कर दिया गया। एनजीटी बेंच में जस्टिस अरुण त्यागी और एक्सपर्ट मेंबर सेंथिल वेल ने डीएम की रिपोर्ट के बाद मामला खत्म कर दिया। बेंच ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 सहित सभी प्रासंगिक मानदंडों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए मामले का निपटारा करते हैं।
बाढ़ में भर गया था रिजॉर्ट में पानी
एसडीएम की रिपोर्ट में रिजॉर्ट की दूरी महज 23 मीटर मानी गई। एसडीएम ने रिपोर्ट में लिखा कि उटंगन नदी अपने स्थान गाटा संख्या 1011 मौजा खंडेर की जगह अरनोटा के गाटा संख्या 39 और 990 में बह रही है। यह बरसाती नदी है। इसका प्रवाह स्थानीय बारिश पर निर्भर है, लेकिन इस रिपोर्ट के उलट एक महीने पहले ही बारिश में उटंगन नदी में बाढ़ आई और इसका पानी रिजॉर्ट में भर गया था। आगरा नहर निचला खंड के अधिशासी अभियंता ने रिपोर्ट में कहा कि आगरा में उटंगन नदी का डूब क्षेत्र चिन्हित नहीं किया गया है।