मोदी सरकार के अंतरिम बजट से जहां कर्मचारी, किसान और मजदूर की बांछे खिल गई हैं, वहीं युवा एक बार फिर निराश हुए हैं। ताजनगरी की झोली भी खाली ही रही है। आगरा के लेदर, पर्यटन और फाउंड्री उद्योग के लिए न रियायतें हैं और न ही कोई विशेष पैकेज। कोई बड़ी योजना भी इन उद्योगों के लिए नहीं लाई गई।
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भले ही कर्ज माफी और प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपये सालाना रुपये की उम्मीद पाले किसानों को निराशा हाथ लगी है, लेकिन बजट में लघु और सीमांत किसानों को छह हजार रुपये सालाना रुपये और समर्थन मूल्य डेढ़ गुना करने से राहत मिली है। इसके तहत आगरा के करीब दो से अधिक किसानों के खाते में सीधे धनराशि पहुंचेगी।
जिले में 3.83 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जिस पर 2.56 लाख किसान खेती करते हैं। केंद्र सरकार के अंतरिम बजट में दो हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि वाले किसानों को सालाना छह हजार रुपये देने की घोषणा की है। इस योजना में 161052 सीमांत और 51823 लघु किसान हैं। ये दोनों ही योजना के दायरे में आ रहे हैं। इस तरह से 212875 किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
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1.52 लाख मजदूरों को मिलेगा लाभ
बजट पर चर्चा करते सरकारी कर्मचारी
बजट में श्रमिक, असंगठित श्रमिकों को बड़ी सौगात मिली है। मजदूरों को मृतक मुआवजा बढ़ाने के साथ पेंशन की सुविधा भी की गई है। इस योजना से जिले के 1.52 लाख मजदूर लाभान्वित होंगे। श्रम विभाग में 152082 श्रमिक पंजीकृत हैं। मजदूर की मौत के बाद परिवार को छह लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
अभी तक डेढ़ लाख रुपये ही मुआवजा दिया जाता था। इसके साथ ही असंगठित क्षेत्र में कार्यरत 60 साल की आयु पार कर चुके लोगों को तीन हजार रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। इसके लिए मजदूरों को हर महीने 100 रुपये जमा कराने होंगे।
इंटक जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि मजदूरों के लिए पीएम मोदी ने बड़ी सौगात दी है। तीन हजार रुपये की पेंशन से मजदूरों को राहत मिलेगी। मृतक मुआवजा छह लाख रुपये करने से परिवार को बड़ी सहूलियत मिलेगी।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष योगेंद्र शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों, किसान और मजदूरों पीएम मोदी ने सौगात दी है। इससे परिवारों को राहत मिलेगी, लेकिन पुरानी पेंशन योजना बहाल न होने से निराशा मिली है।
बजट को बताया राहत भरा
बजट पर चर्चा करते सरकारी कर्मचारी
आगरा में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों ने मोदी सरकार के अंतरिम बजट को राहत भरा बताया है। कर्मचारियों का कहना है कि आयकर छूट की सीमा पांच लाख रुपये तक करने और ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये करने की घोषणाओं से कर्मचारियों को फायदा होगा, लेकिन पुरानी पेंशन को लागू करते तो कर्मचारियों का भविष्य भी सुरक्षित होता।
संभागीय परिवहन कार्यालय में बजट पर चर्चा के दौरान कर्मचारियों ने बताया कि आयकर छूट का फायदा ज्यादातर कर्मचारियों को मिलेगा। कर्मचारियों का कहना था कि 7.5 लाख रुपये तक आमदनी पर पहले 65 हजार इनकम टैक्स के रूप में वसूले जाते थे जो अब घटकर 99840 रुपये हो गए।
इस दौरान एआरटीओ (प्रशासन) एके सिंह, आरआई सुधीर वर्मा, संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ के प्रांतीय संगठन मंत्री प्रशांत शर्मा, भरत सिंह, पवन शर्मा, विकास सचान, अमित सिंह और संगम सिंह आदि मौजूद रहे।
सैनिक, पूर्व सैनिक परिवार खुश
उधर, रक्षा बजट बढ़ाने के साथ ही वन रैंक वन पेंशन के लिए बजट का प्रावधान किए जाने पर आगरा के सैनिक परिवारों और पूर्व सैनिकों ने खुशी का इजहार किया है। आगरा के गांव पछांय के ध्यानपाल सिंह भदौरिया ने कहा कि वन पेंशन वन रैंक के लिए बजट का प्रावधान अच्छी पहल है। देर से सही सरकार ने दुरुस्त कदम उठाया है।
गांव कोरथ के कैप्टन रमा शंकर सिंह ने बताया कि वन पेंशन वन रैंक का लाभ पूर्व सैनिकों को भी मिलेगा। सेना के जवानों के लिए यह सम्मान की बात है। रुदमुली के कैप्टन निहाल सिंह ने कहा कि सैनिकों का भत्ता बढ़ाने के साथ वन रैंक वन पेंशन के लिए बजट में प्रावधान कर सरकार ने सैनिक परिवारों का दिल जीत लिया है।
वहीं अंतरिम बजट पर युवाओं की भी नजरें लगी हुई थीं। सभी ने बड़ी उम्मीदें लगा रखी थीं। खासतौर पर नौकरियों के लिए अवसर प्रदान करने के संबंध में। बजट देखने के बाद युवा निराश नजर आए।
उनका कहना है कि सरकार ने बाकी वर्गों पर ध्यान दिया, उसके मुकाबले युवाओं को कुछ नहीं दिया गया। बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने थे। शिक्षकों की भी बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया है।
बीटेक के छात्र अनंत चौधरी ने कहा कि इस बजट में समाज के बाकी वर्ग का ध्यान रखा गया है, छात्रों और युवाओं की तरफ ध्यान कम दिया गया है। बजट में छात्रों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जानी थीं।
बीएससी वोकेशनल के छात्र हेमंत प्रताप सिंह ने बताया कि युवाओं के सामने रोजगार का बड़ा संकट है। स्नातक और परास्नातक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को करने के बाद भी नौकरियां नहीं मिल रही हैं। इस पर ध्यान नहीं दिया गया।