गुजराज, सौराष्ट्र, काठियावाड़, महाराष्ट्र, जयपुर, कोटा, भरतपुर, उदयपुर, नाथद्वारा, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, बिहार, दिल्ली, ओडिशा, चेन्नई, केरल, कर्नाटक से हजारों श्रद्धालु ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा की अभिलाषा लिए आते हैं।
इन देशों से आते हैं श्रद्धालु
अमेरिका, अफ्रीका, इंग्लेंड, आस्ट्रेलिया, उज्बेकिस्तान, यूक्रेन, कनाडा, त्रिनिदाद, मॉरीशस, दुबई, कतर, नेपाल, रसिया आदि देशों से भी श्रद्धालु भक्तिभावना लिए आते हैं और ब्रज चौरासी कोस की यात्रा करते हैं।
वृंदावन इस्कॉन के पीआरओ रवि लोचनदास ने बताया कि इस्कॉन वृंदावन द्वारा हर वर्ष ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का आयोजन किया जाता है। विगत वर्ष कई देशों से लगभग 1500 विदेशी भक्त यात्रा में शामिल हुए थे। कोरोना के कारण इस वर्ष ब्रज चौरासी कोस यात्रा की संभावना कम है।
दीर्घविुष्ण मंदिर के महंत कांतानाथ चतुर्वेदी ने कहा कि ब्रज चौरासी कोस यात्रा करने के लिए आने वाले श्रद्धालु यहां भक्ति का भाव लेकर आते हैं। श्रद्धालु यहां आकर सोहनी सेवा (स्वच्छता अभियान) को विशेष महत्व देते हैं। उनका मानना है कि ठाकुरजी की इस पावन धरा पर सोहनी सेवा करने से उनके लिए वैकुंठ के द्वार खुल जाएंगे। वहीं यहां प्राचीन और पौराणिक स्थलों के संरक्षण-संवर्धन के लिए श्रद्धालु विभिन्न प्रकार के पौधे रोपने में योगदान दे रहे हैं।
जिला पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा ने कहा कि कोरोना वायरस से सबसे बड़ा नुकसान ब्रज के पर्यटन को हुआ है। हर साल जहां ब्रज में तीन करोड़ लोग आते थे। वहां बीते छह माह में यह आंकड़ा नगण्य है। ऐसे में ब्रज यात्राओं के स्थगित होने से ब्रज के पर्यटन को करीब 60 करोड़ का नुकसान हुआ है।