अपनों को खोया तो रक्तदान की महत्ता समझी। उसी दिन से मन में ठान लिया कि जब भी रक्त की जरूरत पड़ेगी, वह पीछे नहीं हटेंगे। शहर में ऐसे कई महादानी हैं जो औरों की जान बचाने के लिए 20 से 30 बार तक रक्तदान कर चुके हैं। ऐसे महादानियों से लोग सबक लें और रक्तदान जरूर करें।
अमर उजाला फाउंडेशन ऐसे ही महादानियों से एक अक्तूबर को फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर लगाए जाने वाले अमर उजाला कार्यालय गुरुद्वारा गुरु का ताल, एसएन मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक और जिला अस्पताल ब्लड बैंक में रक्तदान की अपील कर रहा है। इस रक्त का एनमिक, कैंसर, लावारिस और गर्भवती महिलाओं के इलाज में उपयोग किया जाएगा।
दोस्त को खोया तो अब तक 21 बार किया रक्तदान
आवास विकास कॉलोनी के 33 साल के अंकुर शंकर गौतम ने बताया कि 2007 में दिल्ली में उनके दोस्त प्रतीक की डेंगू से मौत हो गई थी। उस वक्त मैंने पहली बार रक्तदान किया, लेकिन उसकी जान नहीं बच पाई। तभी से रक्तदान की ठानी और 21 बार रक्तदान और 20 बसा प्लेटलेट्स दान कर चुका हूं।