आगरा। मतदाता सूची को शुद्ध बनाने के प्रयासों को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने ही पलीता लगा दिया। 50 दिन चले विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद भी सूचियों में 40 हजार मतदाताओं के नाम, पता व अन्य त्रुटियां मिली हैं। जबकि 2200 अपात्र भी मिले हैं। जिनका खुलासा दावे और आपत्तियों के रूप में भरे जा रहे फॉर्म से हुआ है।
4 नवंबर से 26 दिसंबर तक बीएलओ के घर-घर जाने के दावों की हवा निकल गई है। अभियान खत्म होते ही निर्वाचन कार्यालय में 1.82 लाख से अधिक नए आवेदनों का अंबार लग गया है। यह सीधे तौर पर सर्वे के दौरान बरती गई लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है।
दूसरे चरण में जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने अफसरों की नींद उड़ा रखी है। 1.40 लाख फॉर्म-6 प्राप्त हुए हैं। यह नए मतदाता बनने के लिए भरे गए। 40 हजार फॉर्म-8 जमा हुए हैं। यह मतदाता सूची में नाम, फोटो या पते के सुधार के लिए भरे गए हैं। 2200 फॉर्म-7 प्राप्त हुए हैं। यह नाम काटने या अपात्रों पर आपत्ति के लिए भरे गए हैं।
हैरानी की बात यह है कि जब डेढ़ महीने तक सर्वे चला, तो बीएलओ ने मौके पर ही इन त्रुटियों को दुरुस्त क्यों नहीं किया? 40 हजार फॉर्म-8 का आना यह बताता है कि या तो कर्मचारी मतदाता के घर पहुंचे ही नहीं, या फिर उन्होंने डाटा मिलान में भारी लापरवाही की।
फॉर्म 7 और 8: क्यों उठ रहे हैं सवाल
निर्वाचन प्रक्रिया में फॉर्म-8 सुधार का आधार है, जबकि फॉर्म-7 का उपयोग मृत, शिफ्टेड या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने (विलोपन) के लिए किया जाता है। एसआईआर के बाद प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में 8.36 लाख नाम विलोपित किए जा चुके थे। फिर भी विलोपन के लिए आवेदनों का सिलसिला जारी है।
करीब 2200 फॉर्म-7 का मिलना संकेत है कि सूची में अभी भी भूतिया या गलत वोटर्स की मौजूदगी है, जिन्हें सर्वे टीम पहचान नहीं पाई। वहीं, 40 हजार सुधार के आवेदन बताते हैं कि पिछली गलतियों को ढोया जा रहा है।
वहीं उप जिला निर्वाचन अधिकारी यमुनाधर चौहान का कहना है कि सभी फॉर्म की बारीकी से जांच होगी। लेकिन सर्वे में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई के सवाल पर फिलहाल चुप्पी साधी गई है।