इसके बाद शुरू हुआ श्याम सुंदर शर्मा की जीत का सिलसिला 2012 के चुनाव में रालोद मुखिया जयंत चौधरी ने तोड़ दिया। लेकिन जयंत चौधरी द्वारा सीट छोड़े जाने पर छह माह बाद ही हुए उपचुनाव में श्याम सुंदर शर्मा फिर काबिज हो गए। पिता लोकमणि शर्मा की विरासत को संभालते हुए श्याम सुंदर शर्मा शुरुआती दौर में तो कांग्रेस का हाथ पकड़ कर चले। राम लहर को भी उन्होंने निष्प्रभावी करते हुए यहां कमल नहीं खिलने दिया। लेकिन, पिछले तीन चुनाव में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और हाथी की सवारी कर अपनी कामयाबी को बरकरार रखा है।
जब-जब विधायक चुने गए, आचार्य बने सरकार में मंत्री
लक्ष्मीरमण आचार्य जब-जब विधायक चुने गए, तब-तब प्रदेश सरकार में मंत्री बने। कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार लक्ष्मीरमण आचार्य पर चार बार मंत्री बनने के साथ ही न्याय मंत्रालय उन्हें दिया गया। कारण यह है वरिष्ठ अधिवक्ता होने के साथ ही पूर्व पीएम इंदिरा गांधी और संजय गांधी के वह वकील भी थे। प्रदेश सरकार में परिवहन और वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय लक्ष्मीरमण आचार्य के पास रहे थे।
दो बार से कम अंतर से जीत रहे हैं पूर्वमंत्री
2012 और 2017 में पूर्वमंत्री श्यामसुंदर शर्मा काफी कम अंतर से विधानसभा पहुंचे। रालोद की टिकट पर चुनाव लड़े योगेश नौहवार ने कड़ी टक्कर दी। 2017 में केवल 432 वोटों के अंतर से वह विधानसभा पहुंच सके। अबकी बार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं भाजपा ने राजेश चौधरी को मैदान में उतारा है तो सपा से संजय लाठर ताल ठोंक रहे हैं।