फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Agra: दुष्कर्म के मामले में भाजपा विधायक के पुत्र को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत अर्जी

Thu, 03 Nov 2022 03:39 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

कोर्ट ने आरोपी के अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए टिप्पणी की कि अभियुक्त नामजद अभियुक्त है। अभियुक्त द्वारा पीड़िता से शादी किया जाना एवं उसके संसर्ग से दो बच्चों का जन्म होना स्वीकार किया गया है। आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। 
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगरा के जिला जज विवेक संगल ने थाना ताजगंज में दर्ज मुकदमे के मामले में भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा के पुत्र लक्ष्मीकांत वर्मा का अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। मामले के अनुसार, पीड़िता ने एसएसपी को प्रार्थना पत्र दिया कि सन 2003 में वह 17 वर्ष की छात्रा थी। छोटे लाल वर्मा की पुत्री निशा वर्मा से उसकी दोस्ती थी। निशा वर्मा के घर पर आना जाना था। निशा ने अपने भाई आरोपी लक्ष्मीकांत वर्मा से परिचय कराया। 16 नवंबर 2003 को करीब 3:00 बजे लक्ष्मीकांत वर्मा ने उसे अपने घर बुलाया और बताया कि उसके परिवारी जन किसी कार्यक्रम में गए हैं। 

विज्ञापन


आरोप है कि लक्ष्मीकांत वर्मा ने पीड़िता को कोल्ड ड्रिंक में कोई बेहोशी की दवा पिलाकर बेहोश कर दिया। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया। होश में आने पर जब उसने शिकायत की बात कही तो आरोपी ने धमकी दी कि उसके पिता बड़े राजनेता हैं। विधायक हैं। शिकायत का कोई असर नहीं पड़ेगा। जान से मार देंगे। आरोपी ने पीड़ित युवती की आपत्तिजनक वीडियो बना ली, जिसके आधार पर उसका शारीरिक शोषण करता रहा।

मंदिर में सात फेरे, फिर कर ली दूसरी शादी 

कुछ वर्ष बाद लक्ष्मीकांत वर्मा ने पीड़िता के कहने पर मंदिर में सात फेरे लेकर शादी कर ली। वह कभी होटल में कभी घर कभी दोस्तों के पास बुलाता। उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाता रहा। कुछ वर्ष बाद उसने पिता के साथ मिलकर संजय प्लेस आगरा में साइबर कैफे खोला। उसको नौकरी पर उसमें रख लिया। 13 फरवरी 2006 को उनके पिता छोटेलाल वर्मा ने लाखों रुपये लेकर किसी दूसरी युवती से लक्ष्मीकांत की शादी करा दी। 

विज्ञापन

कोर्ट ने की यह टिप्पणी 

कोर्ट ने आरोपी की ओर से अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए टिप्पणी की कि अभियुक्त नामजद अभियुक्त है। अभियुक्त द्वारा पीड़िता से शादी किया जाना एवं उसके  संसर्ग से दो बच्चों का जन्म होना स्वीकार किया गया है। निर्विवाद रूप से पीड़िता अपने बच्चों सहित अभियुक्त से अलग रह रही है। आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। जमानत का पर्याप्त आधार नहीं है। जिला जज ने आरोपी का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। पीड़िता की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता बसंत कुमार गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता एसएस चौहान और प्रेम कुमार राजपूत ने पैरवी की।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें