ब्रज क्षेत्र में जातीय समीकरणों को साधते हुए भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला पहले से ही सेट कर रखा है। पिछड़ा वर्ग से प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल केंद्र में मंत्री हैं। ब्राह्मण समाज से योगेंद्र उपाध्याय और अनुसूचित जाति से बेबी रानी मौर्य प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। क्षत्रिय समाज से मैनपुरी के विधायक जयवीर सिंह भी प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।
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चुनाव आते-आते भाजपा ने वैश्य कार्ड भी चला। आगरा के पूर्व मेयर नवीन जैन को राज्यसभा से सांसद बना दिया। यानी भाजपा चुनाव से पहले ही ब्रज की पट्टी पर अगड़े-पिछड़े और दलित के साथ वैश्य मतदाताओं को लुभाने की जमीन तैयार कर चुकी है। अब चुनाव में भाजपा की यह तैयारी दिग्गजों की प्रतिष्ठा के साथ कसौटी पर है। इस चुनाव में माननीयों की अग्निपरीक्षा भी है।
आगरा दक्षिण सीट से विधायक योगेंद्र उपाध्याय ब्रज क्षेत्र में भाजपा का ब्राह्मण चेहरा माने जा रहे हैं। वह प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। ब्रज क्षेत्र की लोकसभा सीटों पर ब्राह्मण वोट दिलाने की चुनौती उनके सामने है। योगेंद्र उपाध्याय मंत्री बनने के बाद फिरोजाबाद, मथुरा, आगरा और मैनपुरी और एटा में भी सक्रिय रहे हैं ।
आगरा की पूर्व मेयर बेबीरानी मौर्य ब्रज क्षेत्र में भाजपा के लिए दलित चेहरे के रूप में पहचान रखती हैं। बेबीरानी भी यूपी सरकार में मंत्री हैं। फिरोजाबाद, मैनपुरी, आगरा, मथुरा और एटा में अनुसूचित जाति का वोट भी काफी तादात में हैं। बसपा के परंपरागत वोट बैंक से इतर दीगर जातियों के वोट बैंक में भाजपा कितना सेंध लगा पाती है यह वक्त तय करेगा। फिलहाल ब्रज क्षेत्र में अनुसूचित जाति बहुल इलाकों में बेबी रानी मौर्य के कद की भी परीक्षा है।
दांव पर एसपी सिंह बघेल का वर्चस्व
ब्रज क्षेत्र में इस चुनाव में दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल वर्तमान में आगरा के सांसद हैं और केंद्र में मंत्री भी हैं। एसपी सिंह बघेल को भाजपा में ब्रज की पट्टी पर पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधत्व करने वाला बड़ा चेहरा माना जाता है इसलिए एसपी सिंह बघेल को भाजपा ने समय-समय पर बड़ी जिम्मेदारियां दी हैं। हालांकि एसपी सिंह बघेल खुद को अनुसूचित जाति का होने का दावा करते हैं लेकिन उनका चेहरा पिछड़ा वर्ग का ही माना जाता है।
बघेल, आगरा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी भी हैं। आगरा से अपनी जीत के साथ-साथ मथुरा, फिरोजाबाद, एटा और मैनपुरी सीट से भी पिछड़ा वर्ग का वोट दिलाने की चुनौती उनके समक्ष है। इसका सीधा कारण यह भी है कि भले ही इस समय बघेल आगरा से सांसद है लेकिन लगातार तीन बार जलेसर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं। इसलिए एटा की बेल्ट पर उनका प्रभाव माना जाता है।
फ़िरोज़ाबाद जिले की टूंडला विधानसभा से वह विधायक रह चुके हैं और प्रदेश सरकार मंत्री भी रहे हैं। फ़िरोज़ाबाद सीट से 2009 में सैफई परिवार के अखिलेश यादव और डिंपल यादव के खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़कर अपनी ताकत का एहसास कराया था, इसलिए फिरोजाबाद में भी उनका काफी प्रभाव माना जाता है। मैनपुरी में करहल विधानसभा सीट से वह अखिलेश यादव के खिलाफ चुनाव लड़े थे। वह मूल रूप से मैनपुरी से सटे इटावा क्षेत्र के निवासी हैं। इसलिए मैनपुरी से भी भाजपा को वोट दिलाने की चुनौती उनके सामने है।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की सौगातें कसौटी पर
यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह क्षत्रिय समाज को प्रतिनिधत्व करते हैं। जयवीर सिंह वर्तमान में मैनपुरी से विधायक हैं मुलायम के गढ़ में भगवा फहरा कर उन्होंने भाजपा के बड़े नेताओं का दिल जीत लिया था। उसका पुरस्कार उन्हें मंत्री पद देकर भाजपा ने दिया। अब चुनाव में उनकी प्रतिष्ठा भी इसलिए दांव पर है क्योंकि जयवीर सिंह फिरोजाबाद के सिरसागंज क्षेत्र के मूल रूप से निवासी हैं।
फ़िरोज़ाबाद, एटा, आगरा, मथुरा और मैनपुरी क्षेत्र में अपने प्रभाव का वोट बैंक को दिलाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। पर्यटन मंत्री के रूप में जयवीर सिंह ने ब्रज क्षेत्र को बड़ी सौगातें दी हैं। कई मंदिरों के कायाकल्प की योजनाएं चलाई है। इस चुनाव में ये सौगातें भी उनकी प्रतिष्ठा की कसौटी पर हैं।
चुनाव आते-आते भाजपा ने ब्रज क्षेत्र में वैश्य वोटों पर पकड़ और मजबूत करने का दांव चला। आगरा के पूर्व मेयर नवीन जैन को राज्यसभा भेज कर सभी को चौंका दिया। हांलाकि आगरा की सीट सुरक्षित होने के कारण नवीन जैन फिरोजाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का मन बना रहे थे।