एसएन प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि इमरजेंसी में हर महीने 10 से 15 मरीज सर्पदंश के आते हैं। बरसात में इनकी संख्या चार से पांच गुना तक बढ़ जाती है। इमरजेंसी में एंटी वेनम इंजेक्शन के इंतजाम हैं। बारिश में मरीजों की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त खरीदी भी की जा रही है। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि 18 सीएचसी पर एंटी वेनम की व्यवस्था है, डिमांड भी भेज दी है। इससे इनका अतिरिक्त स्टॉक करा दिया जाएगा।
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बायगीर के इलाज से नहीं इंजेक्शन से बचेगी जान
एसएन इमरजेंसी के डॉ. चंद्रप्रकाश गौतम ने बताया कि अधिकांश सर्प जहरीले नहीं होते हैं। जहरीले सर्प दो तरह के हैं। न्यूरोटॉक्सिस होने पर तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ता है और लकवा मारने लगता है। ये करैत और कोबरा हैं। हीमोटॉक्सिक होने पर ये शरीर का रक्तसंचार बढ़ा देते हैं। ये वाइपर होते हैं। इनके काटने पर खून का थक्का नहीं जमता और काटे हुए हिस्से से लगातार खून बहता है। ऐसे में काटे हुए हिस्से पर चीरा लगाने, मुंह से जहर चूसने का प्रयास न करें। जहरीले सर्प के काटने पर बायगीर-तंत्रमंत्र के फेर में समय बर्बाद होने से मरीज की जान जा सकती है। ऐसे में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर एंटी वेनम इंजेक्शन और उपचार कराएं।
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