हाईकोर्ट की खंडपीठ मांग का मुद्दा सोमवार को विधानसभा में गूंजा। एत्मादपुर विधानसभा सीट से बसपा विधायक डा. धर्मपाल ने सरकार से पूछा, क्या 1981 में जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट में आगरा को उपयुक्त स्थल मानते हुए यहां हाईकोर्ट की खंडपीठ की सिफारिश 1986 में की गई थी। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी सिफारिश हुई थी। धर्मपाल ने पूछा, तो क्या सरकार रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का प्रस्ताव केंद्र को भेजेगी। यदि हां तो कब तक और नहीं तो क्यों नहीं। इसके जवाब में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने 1994 में प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया था कि वे जिस स्थान को उपयुक्त समझें वहां हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का निर्णय लेकर राज्य सरकार को अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार, खंडपीठ की स्थापना का क्षेत्राधिकार भारत सरकार को है। लिहाजा अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को करना है। विधायक धर्मपाल ने बारिश से हुए फसलों को नुकसान और किसानों की मौत का मामला भी रखा है। जवाब में कहा, इस पर जल्द ही सदन में चर्चा होगी।
विहीन स्कूलों के शिक्षकों का मुद्दा उठा
खेरागढ़ विधानसभा सीट से बसपा विधायक भगवान सिंह कुशवाहा ने सदन में सोमवार को वित्त विहीन स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों का मुद्दा उठाया। कहा कि सरकार ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि वित्त विहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को एक निश्चित धनराशि सरकार देगी, लेकिन बजट में इसका प्रावधान नहीं किया गया है। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री ने कहा कि आंकड़े तैयार कराए जा रहे हैं, जल्द ही फैसला होगा।