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तीर्थनगरी को यह है प्राथमिक जरूरत- लहरा पर बनें पक्के घाट तब स्नानार्थियों को मिलेगी सहूलियत

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सोरोंजी(कासगंज)। तीर्थनगरी सोरोंजी को तीर्थ का दर्जा मिलने के बाद यहां विकास की उम्मीदें जागी हैं। लहरा तट पर पक्के घाट बनें तो स्नानार्थियों को सहूलियत मिलेगी। वहीं शिवरात्रि और श्रावण मास में श्रद्धा का सैलाब उमड़ता है। गंगा की तलहटी के ऊबड़-खाबड़ रास्तों से श्रद्धालुओं को यात्रा की शुरूआत करनी पड़ती है। रास्ता सुगम हो तो तीर्थयात्रियों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत सूकरक्षेत्र के लहरा घाट पर पक्के घाट के निर्माण के लिए 4.90 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है। लहरा पर पक्के घाट का निर्माण किस जगह होगा यह सवाल बना हुआ है। सोरोंजी से लहरा वार्ड व पौराणिक मंदिर लहरेश्वर पांच किलोमीटर की दूर है। प्राचीनकाल में भागीरथी गंगा इसी स्थान पर बहती थी। बरबारा में बांध निर्माण के बाद गंगा की धारा यहां से दो किलोमीटर दूर सहसवान की तलहटी में पहुंच गई। मानसून काल में जब गंगा में बाढ़ आती है, तब गंगा दो माह के लिए लहरेश्वर मंदिर के समीप बहती है। बाकी 10 माह लहरा वार्ड से दो किलोमीटर गंगा की तलहटी में ऊबड़-खाबड़ मार्ग से गुजरकर गंगा की धारा तक पहुंचा जाता है। गंगा की धारा वर्षभर लहरेश्वर मंदिर के नजदीक रहे इसके लिए कार्य की जरूरत है। वहीं पक्के घाट बनें तो यहां श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान बेहद सहूलियत मिलेगी।
- लहरा पौराणिक व प्राचीन घाट है। भागीरथी गंगा मूल स्थान पर ही बहे इसके लिए नमामि गंगे के तहत प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेजने का प्रयास करेंगे।
-श्रीकांत तिवारी, जिला संयोजक नमामि गंगे
- द्वापर युग के अंतिम राजा, राजा परीक्षित ने लहरेश्वर मंदिर में शिवलिंग स्थापित किया था। परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने यहां यज्ञ कर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।
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-पंडित सुशील गौड़
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