40 डिग्री तापमान यानी भीषण गर्मी। मरीज पसीने से तरबतर। कूलर का कोई इंतजाम नहीं। पंखे चल नहीं रहे। तीमारदार कभी हाथ के पंखों से ही मरीजों को हवा झल रहे हैं। कुछ तो अखबार और किताबों से ही हवा करने में लगे हैं। बार-बार अपने कपड़े से ही मरीज का पसीना पोंछ रहे हैं। ये हाल है शहर के जानेमाने चिकित्सा संस्थान एसएन मेडिकल कालेज का। एसएन मेडिकल कालेज में मरीज बुनियादी सुविधाआें तक के लिए मोहताज हैं। शहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार पहुंच चुका है, लेकिन गर्मी से निपटने के लिए एसएन में कोई इंतजाम नहीं है। इसकी पड़ताल बाल रोग और टीबी विभाग से ही शुरू करें। यहां कूलर तो दूर की बात पंखे तक खराब पड़े हैं। स्थिति यह भी कमरों में 10 तो कहीं 12 बेड हैं, इन पर पंखों की संख्या चार ही है। मरीजों ने बताया कि विभागाध्यक्षों से इसकी शिकायत कर चुके हैं लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
नर्सिंग स्टाफ गायब
नर्सिंग स्टाफ के गायब होने से भी व्यवस्थाएं गड़बड़ हो जाती हैं। ऐसे में तीमारदार ही इनकी भूमिका में होते हैं। स्त्री रोग विभाग में फरह के शानू को भी ये समस्या झेलनी पड़ीं। उनकी सास की हालत गंभीर थी, वार्ड ब्वाय को आवाज लगाई लेकिन कोई नहीं आया, मजबूरन अन्य तीमारदारों की मदद से उन्होंने अपनी सास को वार्ड में पहुंचाया।
गर्मी शुरू होने से पहले ही पंखा-कूलर ठीक कराने को कहा गया था। जिन वार्ड में ये दिक्कत है, उनके विभागाध्यक्षों को दुरुस्त कराने को निर्देशित कर दिया है। डा. एसके गर्ग, प्राचार्य एसएन मेडिकल कालेज