15 दिन में जमा करा रहे तीन माह की फीस
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सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई तमाम अभिभावकों के लिए मुसीबत बन गई है। किताब, कापी, यूनिफार्म के साथ अप्रैल में ही तीन माह की फीस जमा कराई जा रही है। कई स्कूलों ने फीस बुक में लिखा है कि 15 अप्रैल के बाद फीस जमा करने पर जुर्माना देना होगा।
नियमानुसार विद्यालयों को प्रति माह फीस लेनी चाहिए। गर्मी की छुट्टी की फीस उसके पहले वाले माह में ली जानी चाहिए। विद्यालय ऐसा नहीं कर रहे हैं। पूरे वर्ष की फीस को चार क्वार्टर में बांट दिया गया है। विद्यालय दो माह की अतिरिक्त फीस लेकर उस पर ब्याज ले रहे हैं। अधिकतर स्कूलों ने फीस जमा करने की तारीख एक से 15 तक निर्धारित की है। इसके बाद 50 से लेकर 250 रुपए तक जुर्माना लिया जा रहा है। यदि किसी स्कूल में 2000 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। 1500 रुपये के हिसाब से भी मासिक फीस जमा की जा रही है तो 90 लाख रुपए जमा होंगे। इस पर स्कूल ब्याज और अन्य लाभ लेते हैं। अधिकतर अभिभावकों के लिए माह की फीस एक साथ देना मुश्किल भरा होता है, इससे अभिभावकों को कोई लाभ नहीं मिलता।
‘तिमाही फीस इसलिए ली जाती है कि अभिभावकों को बार-बार चक्कर न लगाना पड़े। स्कूलों को फीस जमा करने के लिए कम से कम एक माह का समय देना चाहिए। इसके बाद ही जुर्माना लगाना चाहिए, वह भी मामूली। कोई विद्यालय 10 या 15 तारीख तक ही फीस जमा कराना चाहता है तो गलत है।’
संजय तोमर, अध्यक्ष अप्सा
बुक सेलरों से अभिभावकों की नोंकझोंक
प्रिंट रेट पर किताब दिए जाने पर अभिभावक बुक सेलर से रसीद मांग रहे हैं। दुकानदार रसीद देने से मना कर रहे हैं। रसीद दे भी रहे हैं तो प्रत्येक किताब की कीमत अंकित नहीं की जा रही है। सभी के दाम एक साथ जोड़कर दिए जा रहे हैं। निर्धारित दुकानों से ही किताबें मिलने के कारण, अभिभावक खरीदने को मजबूर हैं।
‘स्कूलों का निर्धारित सेलर से किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य करने, दुकानों पर प्रिंट रेट पर किताबें देने और रसीद न देने की शिकायतें मिल रही हैं। कमेटी बनाकर इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।’
अरविंद कुमार पांडेय, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक