बाबू जगजीवन राम ने रक्षा मंत्री के तौर पर 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को बुरी तरह परास्त करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। एक सफल रक्षा मंत्री जो कि दो बार प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन दोनों बार वे पीएम की कुर्सी पर न बैठ सके।
देश के पहले दलित उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की शुक्रवार को जयंती है। डॉ. आंबेडकर के निधन के बाद देश की राजनीति के सबसे बड़े दलित नेता रहे जगजीवन राम का दलितों की राजधानी माने जाने वाले आगरा से बेहद नजदीकी नाता रहा। वह दो बार प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए। 1952 से लेकर 1984 तक वह आगरा में जनसभाएं करने और दलित चेतना जगाने आते रहे।
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अमर उजाला आकाईव के पुराने पन्नों में दर्ज है कि सबसे पहले 21 मार्च 1954 को केंद्रीय संचार मंत्री रहते हुए बाबू जगजीवन राम आगरा आए थे। काजीपाड़ा के नवयुग जाटववीर कन्या पाठशाला के वार्षिक समारोह में उन्होंने कहा कि जब तक वर्ण व्यवस्था खत्म नहीं होती, तब तक अछूतपन खत्म नहीं होगा। रक्षामंत्री रहने के दौरान उन्होंने बिजलीघर स्थित आंबेडकर पार्क में बाबा साहब की प्रतिमा लगवाने के लिए जमीन दिलाई थी। वह दिसंबर 1980 में रामलीला मैदान में और 15 जुलाई 1984 को एक सभा में शामिल होने आगरा आए थे।
बेटे के विवाद से पीएम पद से हुए दूर
कांग्रेस सरकार में लगातार मंत्री रहे बाबू जगजीवन राम, इंदिरा गांधी के निकट थे। जब 1969 में इंदिरा गांधी ने कांग्रेस आई का गठन किया तो उन्हें अध्यक्ष बनाया। 31 अक्तूबर 1969 को कांग्रेस सिंडिकेट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी, बाबू जगजीवन राम और फखरुद्दीन अली अहमद को पार्टी से निकाल दिया था। एक दिसंबर 1969 को इंदिरा कांग्रेस के बाबू जगजीवन राम अध्यक्ष बने। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में वह रक्षामंत्री थे। उन्होनें एक सफल रक्षा मंत्री के तौर पर इस युद्ध में पाकिस्तान को बुरी तरह परास्त करने में बड़ी भूमिका निभाई थी और इसी युद्ध में बांग्लादेश का उदय हुआ।
अमर उजाला आकाईव के पन्नों में दर्ज है कि आपातकाल के बाद वह जनता पार्टी से जुड़ गए। उन्हें दो बार प्रधानमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया, लेकिन सिर्फ 102 सांसदों ने उनके समर्थन में पत्र लिखा। बाद में उन्हें उपप्रधानमंत्री पद दिया गया। एक बार बेटे सुरेश राम के विवाद के कारण उनकी प्रधानमंत्री पद से दूरी बढ़ गई थी।
जब दलित समाज ने हरा दीं तीनों सीटें
बाबू जगजीवन राम के साथ काम कर चुके देवकीनंदन सोन ने बताया कि बाबूजी के प्रधानमंत्री न बनने से नाराज शहर के दलित समाज ने जनता पार्टी की तीनों सीटें हरा दीं। दलित सेवक संघ के अध्यक्ष राजकुमार नागरथ ने बताया कि बाबा साहब के बाद बाबूजी ही दलितों के संरक्षक रहे। उन्होंने आरक्षण की तब तक वकालत की, जब तक जातिवाद की भावना और महत्व खत्म न हो जाए। आगरा में उनके साथ सेठ लक्ष्मण दास, करतार सिंह भारतीय, डाॅ. सिराज कुरैशी, देव कुमार ने काम किया। जाटव समाज उत्थान समिति ने होटल हावर्ड पार्क प्लाजा के सामने पार्क में बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा स्थापित कराई। हर साल जयंती पर समाज के लोग उनकी प्रतिमा पर पहुंचते हैं।
अमर उजाला ने निधन पर दिए दो विशेष पेज
बाबू जगजीवन राम का निधन 6 जुलाई 1986 को हुआ। अमर उजाला ने उनके निधन पर दो विशेष पेज का प्रकाशन किया, जिसमें उनके जीवन से जुड़े पलों और उनके व्यक्तित्व के बारे में बताया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी अपनी विदेश यात्रा बीच में ही छोड़कर अंतिम संस्कार में आए थे। उनके निधन के बाद उनकी बनाई कांग्रेस जे का विलय कांग्रेस में हो गया। राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त ने बाबू जगजीवन राम के लिए लिखा था- जगजीवन तुम्हारा पावन नाम, तुल न सके धरती धन धाम।