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आयुर्वेदिक अस्पतालों में न हैं वैद्य और न ही सुरक्षित भवन

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ज्योंती के आयुर्वेदिक चिकित्सालय के बाहर दबंगों द्वारा लगाई गईं दुकानें - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। जिले के आयुर्वेदिक अस्पताल देखरेख के अभाव में बदहाल होते जा रहे हैं। यहां न तो चिकित्सक हैं और न ही मूलभूत सुविधाएं। चिकित्सकों और फार्मासिस्टों की कमी के कारण यहां मरीजों की संख्या भी लगातार कम होती जा रही है। ग्रामीण अंचल के अस्पताल महीने में 15 दिन बंद रहते हैं। यहां 24 पदों के सापेक्ष महज चार चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं।
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सरकार एक तरफ जहां योग और प्राणायाम पर बल देते हुए स्वदेशी उपचार की बात कर रही है। वहीं दूसरी तरफ आयुर्वेदिक चिकित्सालयों का बुरा हाल है। जिले में दर्ज रिकार्ड पर यदि नजर डाली जाए तो, जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की संख्या 23 है। एक 25 बेड का अस्पताल है तो 16 चार-चार बेड के। छह अस्पतालों पर भर्ती की व्यवस्था नहीं है। इनमें 24 चिकित्सकों के पद सृजित हैं। वर्तमान में 20 पद रिक्त चल रहे हैं।
फार्मासिस्टों की बात करें तो 24 पदों के सापेक्ष मात्र 11 की तैनाती है। वार्ड ब्वॉय के 24 पदों के सापेक्ष मात्र 14 की तैनात हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में यदि कोई पद रिक्त नहीं चल रहा है तो वह स्वीपर का है। स्वीपर के सभी 19 पद भरे हुए हैं। चिकित्सकों की कमी और सुविधाएं न मिलने के कारण मरीजों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। वर्तमान में बमुश्किल से 40 से 50 मरीज ही इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
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25 बेड के अस्पताल में एक भी बेड नहीं सुरक्षित
भले ही कागजों में आयुर्वेदिक का 25 बेड का जिला अस्पताल संचालित हो रहा हो लेकिन हकीकत कुछ ओर ही बयां करती है। अस्पताल में एक भी बेड सुरक्षित नहीं है। ग्रामीण अंचल के चार-चार बेड वाले अस्पतालों का भी यही हाल है।
22 अस्पतालों में 11 फार्मासिस्ट दे रहे उपचार
ग्रामीण अंचल में 22 आयुर्वेदिक चिकित्सालय स्थापित हैं, जिनमें 11 फार्मासिस्टों की तैनाती है। जब 11 अस्पताल खुलते हैं तो 11 बंद रहते हैं। सप्ताह में तीन दिन ही अस्पताल खुल पाता है। वो भी यदि कोई फार्मासिस्ट छुट्टी पर चला गया तो सप्ताह में दो दिन ही अस्पताल खुलते हैं।
खंडहर भवन में उपचार
आयुर्वेदिक जिला अस्पताल खंडहर भवन में संचालित हो रहा है। इसमें कभी भी हादसा हो सकता है। यहां आने वाले मरीज व बैठने वाले चिकित्सक अपने आपको सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए 100 से अधिक बार पत्र लिखे जा चुके है। जर्जर भवन के संबंध में सीएमओ को पत्र लिखकर महिला अस्पताल में जगह मांगी गई है।
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डॉ. निहारिका यादव, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी
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