माफिया अतीक अहमद की हत्या करने वाले शूटर अरुण का पैतृक गांव केंद्र और राज्य की खुफिया एजेंसी के निशाने पर है। अरुण आखिरी बार गांव कब आया था, किस से मुलाकात की थी। उसके दोस्त कौन-कौन हैं। ऐसे कई बिंदुओं पर एजेंसियां जांच करने में लगी हुई है। शूटर का अधिकतर जीवन पानीपत में गुजरा है। इसके बाद भी एजेंसियां कोई भी चूक नहीं करना चाहती हैं। अरुण के माध्यम से अतीक की हत्या की कड़ी सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
गांव में सक्रिय रही एलआईयू
अतीक अहमद को गोली मारने वाला एक शूटर अरुण मौर्य भी है। उसका पैतृक गांव कादरवाड़ी है। इस वजह से यह गांव चर्चा में बना हुआ है। सोमवार को भी स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) के प्रभारी इंस्पेक्टर अपनी टीम के साथ गांव में सक्रिय रहे। हर ग्रामीण से अरुण को लेकर सवाल किए गए। शूटर के पिता के साथ दूसरे रिश्तेदारों का रिकॉर्ड भी खोजा जा रहा है। परिवार की स्थिति के बारे में भी जानकारी की जा रही है।
खुफिया एजेंसी को ये है शक
खुफिया एजेंसी को शक है कि गांव से कोई न कोई सुराग अवश्य मिल जाएगा। जो माफिया अतीक अहमद और उसकी भाई की हत्या का मामला सुलझाने में सहयोग कर सकता है।
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एसटीएफ पहुंचने के लगते रहे कयास
शूटर अरुण मौर्य के गांव कादरवाड़ी में एसटीएफ की टीम के पहुंचने की चर्चाएं होती रहीं। ग्रामीणों को जब भी कोई वाहन गांव में आता दिखता है, तो एसटीएफ के आने की कयास लगने लगती है। अभी तक एसटीएफ की कोई टीम गांव नहीं पहुंची है। पुलिस अधिकारी भी जांच के लिए टीम आने की संभावना से इंकार नहीं कर रहे है।
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इन सवालों के खोजे जा रहे जवाब
1- अरुण का बचपन कैसा गुजरा है, उसके कौन-कौन साथी थे?
2- वह किसी बड़े गैंग से नहीं जुड़ा हुआ है। अतीक को क्यों मारना चाहता था?
3- परिवार में सबसे अच्छे संबंध किस से थे। गांव में किस से मिलता था?
4- अतीक अहमद की हत्या से पहले गांव कब आया था ?
5- अरुण का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी खोजा जा रहा है।