बाह: अटेर पुल के आवागमन के लिए बाजार बंद करने के बाद भी नहीं सुधरे हालात, राहगीर कर रहे जोखिम
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बाह। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर चंबल नदी स्थित अटेर पुल पर आवागमन शुरू न होने के विरोध में ग्रामीण और कारोबारी लगातार बाजार बंद कर प्रदर्शन कर रहे हैं। बाह में भी पुल पर आवागमन शुरू कराने के लिए आंदोलन होगा। पुल शुरू न होने की बजह से दोनों राज्यों के 150 गांवाें के लोग पुल तक पहुंचने को अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
पिछले दिनों अमर उजाला ने चंबल नदी के अटेर पुल तक पहुंचने के लिए 150 गांवों के लोग 14 मीटर नसैनी (सीढ़ी) चढ़ कर जान जोखिम में डालने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। भारतीय किसान यूनियन (सर्वाेदय) ने दो दिन पहले बाह के एसडीएम विनोद कुमार को ज्ञापन सौंप कर पुल पर आवागमन शुरू कराने की मांग की थी। जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि एक सप्ताह में आवागमन शुरू न होने पर तहसील मुख्यालय बाह पर भाकियू ग्रामीण किसानों के साथ धरना प्रदर्शन करेगी। बतादें कि अटेर पुल बनकर तैयार हो गया है। जैतपुर के नंदगवा एवं भिंड के अटेर की सीमा पर पहुंच मार्ग का निर्माण नहीं हुआ है। निर्माण एजेंसी ब्रिज कार्पोरेशन ने 35 से 40 फीट खाई खोद दी है, जिससे पुल पर आवाजाही बंद हो गई है। समय और दूरी की बचत के चक्कर में जैतपुर, अटेर, बाह, भिंड के लोगों ने पुल पर चढ़ने के लिए नसैनी रख ली है। क्योंकि उदी के रास्ते सफर करने पर 150 गांवों के लोगों को 50 से 60 किमी अतिरिक्त चलना पड़ रहा था।