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पुराने पन्नों से: अटल के निर्णय से जनसंघ को लगा था धक्का, चुनाव क्षेत्र बदलने से पार्टी में फैल गई थी बेचैनी

Thu, 28 Mar 2024 02:14 PM IST
अनुज कुमार संजीव सिंह, अमर उजाला, आगरा

सार

चुनावी किस्सों में यहां हम बात कर रहे हैं आम चुनाव 1971 की। जहां अटल बिहारी वाजपेयी ने अचानक अपना लोकसभा क्षेत्र दल दिया था। उनके इस निर्णय से उम्मीदवारों में निराशा फैल गई थी।
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अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी व अन्य। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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आम चुनाव 1971 की घोषणा हो चुकी थी। अटल बिहारी वाजपेयी ने अचानक बलरामपुर के बजाय ग्वालियर से लोकसभा चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। इससे पार्टी के उम्मीदवारों में निराशा फैल गई। पार्टी के नेताओं ने उनके इस फैसले को जनसंघ के लिए धक्का माना। वाजपेयी उस समय जनसंघ के अध्यक्ष थे।
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अमर उजाला के एक फरवरी 1971 के अंक में प्रकाशित समाचार के अनुसार, अटल के बलरामपुर से न लड़ने के निर्णय से जनसंघ के प्रत्याशियों के मुंह लटक गए थे। पार्टी नेताओं ने माना था कि उनके बलरामपुर से न लड़ने से विरोधी दलों को यह प्रचार करने का मौका मिल जाएगा कि यूपी में जनसंघ की स्थिति कमजोर है।

पार्टी की हालत कमजोर होने के कारण ही वाजपेयी ने विजयाराजे सिंधिया की वजह से मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र ग्वालियर से लड़ने का फैसला किया है। समाचार के अनुसार, जनसंघ के एक प्रमुख नेता ने माना था कि उनके बलरामपुर से न लड़ने से प्रदेश में पार्टी के अन्य प्रत्याशियों पर भी खराब असर पड़ेगा। उनका मानना था कि इससे तत्कालीन गठबंधन सरकार जो उस समय संकट में थी और भी दिक्कत में आ जाएगी।
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जनसंघ के लिए थी कड़ी चुनौती
रुहेलखंड (बरेली) मंडल में 1967 के चुनाव में जनसंघ के दो प्रत्याशी विजयी हुए थे, लेकिन 1971 में कांग्रेस और मुस्लिम मजलिस मिलकर जनसंघ के लिए कड़ी चुनौती पेश कर रहे थे।
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