उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में अमेरिकी नागरिकों से ठगी का मामला सामने आया है। यहां फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाला अनुराग खुद भी काल सेंटर में काम करता था। लॉकडाउन में नौकरी छूटने पर उसने ऑनलाइन ठगी सीखी थी। पुलिस के मुताबिक, संचालक ने स्काइप की मदद से लोगों का डाटा खरीदा। कर्मचारी अंग्रेजी में बात करके फंसाते थे। इसके बाद हवाला और बिट क्वाइन के माध्यम से रकम आती थी। दो साल में संचालक ने करोड़ों रुपये कमाए हैं। आरोपी के खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
अनुराग अब तक 50 से 60 हजार लोगों का डाटा खरीद चुका है। डाटा में नागरिक का नाम, मोबाइल नंबर, स्टेट और कितने लोन की जरूरत है, यही होता था। कॉलिंग के लिए जॉइपर एप से लाइसेंस लेते थे। इससे कॉल करने पर नंबर अमेरिका का आता था। वायस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल का प्रयोग करते थे। कॉल सेंटर के कर्मचारी अंग्रेजी जानते हैं। सीमित भाषा में बात करते थे। रोजाना 150 लोगों को फोन करते तो दो से पांच लोग झांसे में आ जाते थे। निजी जानकारी ले लेते थे।
पुलिस ने बताया कि कॉल करने पर कर्मचारी अपना नाम डेविड, हेरी आदि अमेरिकी नागरिकों की तरह बताते थे। सस्ते ब्याज पर लोन की बात करते थे। तैयार होने पर बैंक खाते, सोशल सिक्योरिटी नंबर और लाइसेंस की जानकारी प्राप्त करते थे। जानकारी कर्मचारी संचालक को देते थे। वो इसे आगे उपलब्ध करा देता था। बैंक में कॉल कर कहा जाता था कि ठगी हो गई है। इस पर बैंक ग्राहक के खाते में जितनी की ठगी होती थी, उस रकम को वापस कर देता था।
मगर, यह रकम जांच पूरी होने के बाद ही प्रयोग में लाई जा सकती थी। इसका फायदा गिरोह के सदस्य उठाते थे। वो अमेरिकी लोगों को कॉल करके कहते थे कि आपके खाते में लोन की रकम आ गई है। गिफ्ट वाउचर लेने पर प्रयोग में ला सकते हैं। गिफ्ट वाउचर की जानकारी लेकर अमेरिकी एजेंट कैश करा लेते थे। एजेंट अपने कमीशन के बाद रकम को हवाला और बिट क्वाइन के माध्यम से भारत में भेजते थे, जो कॉल सेंटर संचालकों को मिल जाती थी।
कॉल सेंटर संचालक अनुराग के दो खातों की जानकारी पुलिस को मिली है। इनमें एक आगरा की निजी बैंक का है, जबकि दूसरा बिट क्वाइन का है। पुलिस दोनों की जानकारी जुटा रही है। इनमें कब कितनी रकम आई। किन खातों से रकम भेजी गई। यह सब पता किया जा रहा है। बिट क्वाइन को कैश कराने के लिए दोगुना कर देना होता है।