सवाल उठ रहा है कि जब मोहम्मद जैद के खिलाफ कई संगीन केस दर्ज थे। इसके बावजूद उनका शस्त्र लाइसेंस कैसे बन गया। शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण भी होता रहा। पुलिस ने कभी किसी केस का जिक्र क्यों नहीं किया। एसटीएफ कार्यालय में पूछताछ में जैद ने उन्हें बताया कि उनका लाइसेंस वर्ष 2003 में बना था।
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एसटीएफ के अनुसार आरोपी जैद ने अपना शस्त्र लाइसेंस गुरुग्राम (हरियाणा) ट्रांसफर करा लिया था। मुकदमे में नामजद अरशद उसका भाई है। वह नेशनल शूटर है। उसके नाम पांच शस्त्र लाइसेंस थे। शूटरों को प्रति वर्ष हजारों कारतूस मिलते हैं। इन्हें कहां खपाया जा रहा था। खुफिया एजेंसियां भी अब जानकारी जुटा रही है। विदेशी हथियार रखने वाले लोगों से भी गिरोह के सदस्यों के संबंध बताए गए हैं। एसटीएफ शक के दायरे में आने वाले सभी लोगों से पूछताछ करेगी।
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