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अपराजिताः खुद पर भरोसा कर तय किया लक्ष्य, फार्मासिस्ट बनकर मरीज का मर्ज दूर करने में की मदद

Sat, 05 Sep 2020 12:09 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

डी-फार्मा की परीक्षा के वक्त वह गर्भवती थी, ससुरालीजनों ने कहा कि परीक्षा रहने दो, अगले साल देख लेना। मेरे लिए यह चुनौती थी, जिसे स्वीकारा और परीक्षा दी। पसंदीदा नौकरी कर संतुष्टि मिल रही है। 
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शर्मिष्ठा चाहर, एसएन मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मरीज को सही दवा और जानकारी नहीं दी गई तो मर्ज भी ठीक नहीं होगा। डॉक्टरों के साथ फार्मासिस्ट की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जब महिलाओं ने इस क्षेत्र में आना चाहा तो परिजन, रिश्तेदार और पड़ोसियों ने भी सवाल खड़े किए। लेकिन इन्होंने खुद पर भरोसा कर लक्ष्य तय किया। जो लोग विरोध करते थे आज उनके फैसले का सम्मान करते हैं।
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पति और ससुर के सहयोग से कोर्स पूरा किया
शर्मिष्ठा चाहर ने बताया कि उनकी शादी इंटर पास करने के बाद हो गई, मन में डर था कि शादी के बाद पढ़ाई बंद न हो जाए। पति और ससुर ने सहयोग दिया और डी-फार्मा को कोर्स पूरा किया। पड़ोसी कहते थे कि बहू से नौकरी करवाओगे, लेकिन ससुरालीजनों के बेहतर सोच के कारण उनकी पढ़ाई पूरी हुई और जॉब भी लगी।

अर्जुन नगर निवासी शर्मिष्ठा ने कहा कि सभी लोग मेरे और ससुरालीजनों के फैसले की सराहना करते हैं। वह बोली कि बेटियों की पढ़ाई और पसंदीदा नौकरी करने में अपनों का सहयोग बेहद जरूरी है। - शर्मिष्ठा चाहर, एसएन मेडिकल कॉलेज
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दीप्ति मैरोठिया, नीरज देवी, - फोटो : अमर उजाला
खुद पर भरोसा तो सभी देते हैं साथ 

बेटियों के लिए राह कभी आसान नहीं है। मेरा तो यही मानना है कि खुद पर भरोसा है और लक्ष्य तय है तो सभी साथ देते हैं। कई बार फैसलों का विरोध भी होता है, लेकिन सही ढंग से अपनी बातों को परिवारों के सामने रखें। कमला नगर निवासी नीरज देवी ने बताया कि मैंने भी शुरू से ही अपना लक्ष्य तय किया था, हौसले को देख परिजनों ने सहयोग किया। परिवार और अस्पताल की जिम्मेदारी निभाने में दिक्कत तो होती है, लेकिन अब सब व्यवस्थित ढंग से हो रहा है। - नीरज देवी, एसएन मेडिकल कॉलेज

शिक्षक बनने को कहते, लेकिन मैंने चुना फार्मासिस्ट

मैंने परिवार में जब डी-फार्मा करके फार्मासिस्ट बनने के लिए बताया तो परिजन बोले, बहुत मेहनत करनी पड़ेगी, शिक्षक बन जाओ। लेकिन मन नहीं माना और 2000 में डी फार्मा कोर्स किया। 2015 में एसएन मेडिकल में नौकरी लगी। इंद्रपुरी रहने वाली दीप्ति ने बताया कि चुनौती की बात करें तो मरीज और परिवारों की देखभाल में शुरूआत में दिक्कत आई, लेकिन अब दोनों ही जिम्मेदारी पूरी तरह से संभाल रही हूं। -दीप्ति मैरोठिया, एसएन मेडिकल कॉलेज
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कल्पना मोघे,प्रतिभा शर्मा, एसएन मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
अपनों का विरोध तोड़ देता है हिम्मत
 
एसएन मेडिकल कॉलेज में फार्मासिस्ट प्रतिभा शर्मा का कहना है कि बेटियों को उच्च शिक्षा और पसंदीदा नौकरी के लिए बेटियों का संघर्ष अभी भी कम नहीं हुआ। अपनों का विरोध हिम्मत तोड़ देता है, मुझे भी इसका सामना करना पड़ा। लेकिन जब सफलता हाथ लगी तो सभी ने मेरे हौसले का सलाम किया। आवास विकास कॉलोनी रहने वाली प्रतिभा  बेटियों से यही अपील करती हैं कि विरोध भले ही कोई करे, आप हिम्मत नहीं हारें, परिजनों को समझाएं और मेहनत करें। - प्रतिभा शर्मा, एसएन मेडिकल कॉलेज

गर्भवती थी, फिर भी दी परीक्षा और बनी फार्मासिस्ट 

मेरी शादी 1984 में हो गई थी। शादी होने के बाद पढ़ाई छूटने का डर था, लेकिन ससुरालीजनों ने सहयोग किया। मारुति एस्टेट की रहने वाली कल्पना ने बताया कि डी-फार्मा की परीक्षा के वक्त वह गर्भवती थी, ससुरालीजनों ने कहा कि परीक्षा रहने दो, अगले साल देख लेना। मेरे लिए यह चुनौती थी, जिसे स्वीकारा और परीक्षा दी। पसंदीदा नौकरी कर संतुष्टि मिल रही है। -कल्पना मोघे, एसएन मेडिकल कॉलेज 
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