इस प्लास्टिक कचरे को री-साइकिल करने के लिए गजरौला, काशीपुर की फैक्ट्रियों में भेजा जाता है। नगर आयुक्त के मुताबिक प्लास्टिक कचरे से सड़कों को बनाने की शुरूआत आगरा में भी की जाएगी। डामर की सड़कों में ही प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा मंदिरों से एकत्र किए जा रहे फूलों से दो टन खाद बनाई जा रही है।
गीला-सूखा कूड़ा अलग आएगा तो बढ़ेगी क्षमता
कुबेरपुर, धांधूपुरा, आईएसबीटी मिलाकर अब हम 35 मीट्रिक टन खाद बना रहे हैं। लोग गीला और सूखा कचरा अलग-अलग देना शुरू कर देंगे तो खाद बनाने की क्षमता और बढ़ जाएगी। कोशिश है कि जितना गीला कूड़ा निकले, पूरे की खाद बनाई जाए- अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त