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पीड़ा: बाढ़ मेें बर्बाद हैं गए, बाजरा बेचि कैं मोड़ी मोड़न कौं खील गट्टा लैंगे

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दर्द: बाढ में बरबाद है गये, बाजरा बेचि कैं मोडी मोडन कौं खीलगटा लेंगे, ट्राली में बाजरा लाद कर जरार ? - फोटो : Agra Dehat
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बाह। चंबल की बाढ़ से बर्बाद हुए परिवार बाजरा आदि बेचकर बच्चों के लिए दिवाली का खील गट्टा खरीद रहे हैं। बुधवार को जरार बाजार बाजरा बेचने पहुंचे गुढ़ा गांव के किसान बोले कि बाढ़ में बर्बाद हैं गए, बाजरा बेचि कैं मोड़ी-मोड़न कौं खील गट्टा लैंगे।
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बारिश से चंबल नदी में आई बाढ़ में तबाह हुए बाह के 35 गांवों के लोग दिवाली पर उदास हैं। बताया कि फसल, घर नष्ट होने पर सर्वे जरूर हुआ, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। बुधवार को गुढ़ा गांव के लोग ट्रॉली में बाजरा लाद कर जरार के बाजार पहुंचे थे। बातचीत के दौरान उनका दर्द छलक पड़ा।
गांव के लालाराम, राम सेवक, रामकेश, सचिन, गंगा देवी, श्याम देवी, बबली आदि बोलीं कि बाढ़ में सब बर्बाद हैं गए, जेब खाली ए, बच्चनि कौ मनु राखिवें को बाजरा बेचने आए हैं उन्होंने बताया कि सर्वे के बाद दिवाली पर मुआवजे की उम्मीद थी, लेकिन न मिलने से त्योहार फीका रहेगा।
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वहीं, जैतपुर के गुमान सिंह पुरा गांव में महीनेभर के भीतर बुखार से पांच बच्चों समेत नौ लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पूरा गांव में मातम सा पसरा है। यहां के लोगों ने बताया कि इस साल गांव में दिवाली नहीं मनेगी।
गांववालों के मुताबिक अब भी गांव के कई लोग बुखार से पीड़ित हैं। घर-घर बीमारों की चारपाई बिछी है। कोई इटावा में तो कोई आगरा में बच्चों का इलाज करा रहा है। गांव के चंद्र प्रताप, राम दत्त, मनीराम, प्रहलाद, दशरथ, हर गोविंद आदि ने बताया कि बुखार के इलाज में जेब खाली है। पूरा गांव बीमारी से परेशान हैं।
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