बर्फ फैक्टरी में अमोनिया के रिसाव से दो घंटे तक अफरातफरी मची रही। दमकल कर्मियों को रिसाव पर काबू पाने में एक घंटा लग गया। इस दौरान चार बच्चे बेहोश हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
आगरा के औद्योगिक क्षेत्र नुनिहाई में शनिवार की शाम 5:30 बजे गर्ग आइस फैक्टरी से अमोनिया गैस का तेज रिसाव हुआ। कर्मचारी जान बचाकर बाहर भागे। कुछ ही देर में घनी आबादी में गैस फैलने से लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। चार बच्चे बेहोश हो गए, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। गुस्साए लोगों ने नुनिहाई-रामबाग लिंक रोड पर जाम लगाकर हंगामा किया। तब कहीं जाकर छह से ज्यादा दमकलों के साथ पहुंचे फायर कर्मियों ने शाम 7:30 बजे रिसाव बंद किया। घटना की जानकारी होने पर एडीएम सिटी, एसीपी सहित अन्य लोग भी पहुंचे।
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कमला नगर के आशीष व प्रज्ञा की नुनिहाई में आइस फैक्टरी है। परिसर में कई गोदाम भी हैं। कर्मचारियों ने बताया कि एक टैंक से अचानक अमोनिया गैस का रिसाव होने लगा। गैस पूरे परिसर में फैल गई। कर्मचारी खांसते और आंखें मलते हुए बाहर की ओर भागे। कुछ कर्मचारियों ने मुंह व नाक को कवर करके रिसाव को बंद करने की कोशिश की मगर तेज रिसाव के कारण सफलता नहीं मिली। कुछ ही देर में गैस आसपास की आबादी वाले घरों तक पहुंच गई। घरों के बाहर खेल रहे बच्चों और आसपास के लोगों को परेशानी हुई।
तमाम लोगों ने घरों को चारों तरफ से बंद कर लिया। अशोक कुमार शर्मा और देवेंद्र के घर पास ही बने हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी। सूर्यांश (6), शिवांश (3), अनाया सिंघल (3), पीटर (3) बेहोश हो गए। इन्हें गोयल अस्पताल ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
एक घंटे तक दमकलें नहीं पहुंचीं, हंगामा
एक घंटे तक घटनास्थल पर दमकलें नहीं पहुंचीं। पुलिसकर्मियों ने ही हालत बिगड़ने पर लोगों को अस्पताल भिजवाया। इस पर गुस्साई महिलाओं ने नुनिहाई रोड पर जाम लगाकर हंगामा किया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने समझा बुझाकर जाम खुलवाया। देर शाम एडीएम सिटी, एसीएम सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए। फैक्टरी में हुए रिसाव की जांच की जा रही है।
पानी की बौछारों से नियंत्रित किया रिसाव : एसीपी
शाम करीब 7:30 बजे रिसाव बंद कराया जा सका। एसीपी हेमंत कुमार ने बताया कि दमकल कर्मियों ने सभी वाल्व बंद करके रिसाव को कम किया। पानी की बौछारें भी डालीं ताकि वातावरण में गैस का दुष्प्रभाव कम हो सके। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद हालात नियंत्रित किए जा सके।