राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में 23 जुलाई से स्थाई नियुक्ति की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे एंबुलेंस सेवा पायलट और ईएमटी ने रविवार की रात से एंबुलेंस का चक्का जाम कर दिया। मैनपुरी जिले में सोमवार को 108, 102 और एएलएस (जीवन रक्षक प्रणाली) एंबुलेंस सेवा ठप रही। इससे जिले की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गईं। तीमारदार मरीजों को ई-रिक्शा, टेंपो और निजी वाहनों से अस्पताल लेकर पहुंचे।
बाइक पर प्रसूता को लेकर पहुंचा
पुरानी मैनपुरी निवासी राजेश कुमार की पत्नी विमला देवी का प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने कई बार एंबुलेंस सेवा के लिए कॉल किया। एंबुलेंस नहीं मिली तो राजेश का भाई ब्रजेश प्रसव पीड़िता को बाइक से ही लेकर सौ शैया अस्पताल पहुंचा।
बाइक से जच्चा-बच्चा को ले गए घर
ज्योंती तिराहा निवासी अर्चना पत्नी राजेश कुमार ने रविवार को जिला अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया। सोमवार को अस्पताल प्रशासन ने जच्चा-बच्चा की अस्पताल से छुट्टी कर दी। एंबुलेंस नहीं मिली, राजेश पत्नी और बच्चे को बाइक से घर ले गया।
टेंपो से प्रसूता को लेकर पहुंचे अस्पताल
विधूना निवासी स्वाती सिंह को सोमवार को प्रसव पीड़ा उठी। परिजनों ने कई बार 102 एंबुलेंस सेवा को फोन किया लेकिन उन्हें एंबुलेंस नहीं मिल सकी। इसके बाद परिजन टेंपो से प्रसूता को लेकर सौ शैया अस्पताल पहुंचे।
मांगें पूरी होने तक रहेगा चक्का जाम
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कोरोना महामारी के बीच उन लोगों ने जीवन रक्षक एंबुलेंस, 108 एंबुलेंस और 102 एंबुलेंस पर अपना जीवन दांव पर लगाकर लोगों की सेवा की। अब सरकार ने दूसरी कंपनी को ठेका दिया तो कंपनी ने पायलट और ईएमटी को हटाने का निर्णय ले लिया।
सरकार को चाहिए कि एंबुलेंस पायलट और ईएमटी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत नियमित किया जाए। एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष विजय यादव का कहना था कि मांगें पूरी न होने तक चक्का जाम रहेगा।
प्रदर्शन में ब्लॉक अध्यक्ष राजेश गौतम, अरुण यादव, नवीन पाठक, रवींद्र कुमार, शिवरतन यादव, रंजीत यादव, संजीव कुमार, राजेंद्र यादव, संजय चतुर्वेदी, रंजीत मिश्रा, धर्म सिंह, मोहित कुमार, राजेंद्र कटियार, शैलेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, विवेक कुमार आदि शामिल रहे।