आगरा के बाह सीएचसी के डॉक्टरों, स्टाफ और एंबुलेंस चालक ने डेढ़ घंटे का सफर 45 मिनट में पूरा कर एक प्रसूता की जान बचाई। ऑपरेशन के दौरान बच्चे के गले में प्लेसेंटा फंसने से प्रसूता की जान खतरे में पड़ गई थी। जच्चा-बच्चा की जान बचने पर परिवार बोल उठा कि वाकई डॉक्टर भगवान होते हैं।
बाह सीएचसी में 6 जनवरी को जैतपुर के नगला ब्रज निवासी मुंबई में खाद्य निरीक्षक विजय सिंह की पत्नी पूजा को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। पूजा का पहला गर्भ था। बच्चा उल्टा होने से ऑपरेशन किया गया। सर्जन डॉ. रूपम अग्रवाल, निश्चेतक डॉ. स्नेहल गुप्ता, अधीक्षक डॉ. जितेंद्र वर्मा, फार्मासिस्ट संजय बघेल की टीम ने ऑपरेशन किया।अधीक्षक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि बेटे का जन्म हुआ। प्लेसेंटा फंसा रह गया। अत्यधिक रक्तस्राव से प्रसूता की जान खतरे में पड़ गई।
आनन-फानन 108 एंबुलेंस से डॉ. स्नेहल गुप्ता और फार्मासिस्ट प्रसूता को खुद ही एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर गईं। प्रसूता की हालत देख चालक शीलेश ने महज 45 मिनट में एंबुलेंस को एसएन पहुंचा दिया। रास्तेभर प्रसूता की हालत को स्थिर बनाए रखने के लिए स्टॉफ जूझता रहा।
प्लेसेंटा निकाले जाने के बाद ऑपरेशन करने वाली टीम की जान में जान आई। अधीक्षक ने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ एवं सुरक्षित हैं। प्रसूता को सीएचसी लाने वाले ससुर रामबरन ने बताया कि ऑपरेशन करने वाली टीम उनके लिए भगवान का रूप साबित हुई है। संवाद