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अमर उजाला अभियान शिक्षा: ऑनलाइन पढ़ाई से परेशान हुए बच्चे, खेल, मनोरंजन और प्रतियोगिताओं से दूर किया जा रहा तनाव

Sat, 26 Mar 2022 01:48 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चे कहीं न कहीं तनावग्रस्त रहे। कहते हैं पढ़ाई के साथ खेलकूद भी जरूरी होता है। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को शिक्षा तो मिली, लेकिन वे घर में कैद होकर रह गए थे।
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डीपीएस स्कूल में खेलती छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण काल में घर में रहकर और ऑनलाइन शिक्षा में तनावग्रस्त हुए बच्चों को तनाव मुक्त करने के लिए स्कूलों ने पहल की है, जिससे छात्र-छात्राओं को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े। स्कूलों में बच्चों के मनोबल को बढ़ाने के लिए खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। काउंसलिंग की व्यवस्था भी कराई गई है। अधिकांश स्कूल काउंसलर नियुक्त करके बच्चों की काउंसलिंग करा रहे हैं।

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डीपीएस स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. गौरव दुबे बताते हैं कि दो साल से कोरोना के कारण स्कूलों में बच्चे नाम मात्र ही आ रहे थे। अधिकतर स्कूल बंद थे और बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे। ऐसे में छात्र-छात्राओं के अंदर चिड़चिड़ापन की शिकायतें मिल रही थीं। जब स्कूल खुले तो शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ अभिभावकों की शिकायतें मिलनी शुरू हुईं। इसके बाद विद्यालय में खेल एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गतिविधियों को बढ़ाया गया।

शिक्षकों ने बताया कि अधिकतर बच्चों को मोबाइल की आदत इतनी हो गई है कि क्लास में उनका मन नहीं लग रहा। वह चिड़चिड़े होने के साथ बात भी सही तरीके से नहीं कर रहे हैं। उठने और बैठने के साथ कई तरह के बदलाव देखे जा रहे हैं। कुछ अभिभावकों ने भी संपर्क कर अपने बच्चों की स्थिति से अवगत करवाया। यह चिंता का विषय था, लेकिन इसे स्कूल प्रबंधन ने गंभीरता से लिया और ऐसे छात्रों का तनाव दूर करने के लिए रणनीति बनानी शुरू की। सबसे पहले अभिभावकों से उनकी दिनचर्या के बारे में पता किया और फिर काउंसलिंग का सहारा लिया गया। इसके साथ ही खेल, मनोरंजन और प्रतियोगिताओं की शुरूआत कराई गई। इसके अब सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

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डीपीएस स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे - फोटो : अमर उजाला

ऐसे हो हो सकते हैं ठीक 

- अभिभावकों को चाहिए कि सबसे पहले उनकी गतिविधियों पर ध्यान दें। 
- बच्चों को समझाएं, न ही उन्हें किसी तरह दबाव में लें और खाना समय पर खिलाएं। 
- बच्चों को मोबाइल सिर्फ पढ़ाई के लिए दें और स्कूल जाने के लिए प्रेरित करें। 
- उन्हें बताए कि हम आपके अपने हैं और ऐसा नहीं चाहते हैं कि आपके साथ कुछ गलत हो। 
- ऐसे बच्चों को समय पर सोने दें और सुबह जागने में सख्ती नहीं बरतें। 
- स्कूलों को भी चाहिए कि ऐसे बच्चों पर किसी तरह का दवाब न दें और खेल, कूद व मनोरंजन में भागीदारी कराएं। 

बोले शिक्षक 

लगातार ऑनलाइन कक्षाओं व मोबाइल चलाने से बच्चों में आए बदलाव और तनाव को दूर करने के लिए स्कूल में खेलों और मनोरंजन आदि गतिविधियां करवाई जा रही हैं। इसके चलते बच्चों के बदले व्यवहार में सुधार देखा जा रहा है। अभिभावक भी काफी राहत महसूस कर रहे हैं। 
- भावना शर्मा, सीनियर कोआर्डिनेटर, डीपीएस स्कूल

लगातार मोबाइल चलाने से उंगली और सिर दर्द बढ़ने लगा था। कई तरह की अन्य परेशानी भी आई, लेकिन अब स्कूल खुलने पर यहां मिल रही सुविधाओं से काफी राहत महसूस हो रही है।
- वैष्णवी जैन, कक्षा 10

- ऑनलाइन पढ़ाई की आदत हो गई थी। ऑफलाइन क्लास शुरू हुई तो इससे अब छुटकारा मिल गया है। कक्षा में पढ़ाई करने के बाद अब मोबाइल की ज्यादा जरूरत नहीं होती है। 
- अनुष्का चतुर्वेदी, कक्षा 12

- ऑनलाइन पढ़ाई और ऑफलाइन पढ़ाई में बहुत अंतर समझ आ रहा है। ऑफलाइन पढ़ाई से ही शिक्षा की नींव मजबूत होती है। क्लास में बैठकर पढ़ने में मन लगता है।
- शौर्य दीक्षित, आठवीं 

- दो साल में हमारी पढ़ाई का नुकसान काफी हुआ। अब स्कूल में पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियां करने का मौका मिलता है। अब पढ़ाई फिर से अच्छी तरह से कर रहे हैं।
- विशरूद गुप्ता, कक्षा10
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