अमर उजाला सफलता के 70 वर्ष पूरे कर रहा है। 18 अप्रैल को स्थापना दिवस है। पाठकों की हर कसौटी पर खरा उतरने के बाद यह विश्वसनीयता का पर्याय बन चुका है। लोग इसे महज अखबार नहीं, बल्कि समाज के सजग प्रहरी के रूप में देखते हैं। यह उन दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। अमर उजाला पढ़े बिना चैन नहीं मिलता।
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अमर उजाला उत्कर्ष के 70 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अमर उजाला कार्यालय में सोमवार को ‘संवाद’ का आयोजन किया गया। इसमें शिक्षा और चिकित्सा वर्ग के प्रबुद्धजनों ने हिस्सा लिया और उद्गार व्यक्त किए। अमर उजाला से जुड़े अपने संस्मरण सुनाए।
अधिकतर लोगों का कहना था कि यहां अखबार का मतलब अमर उजाला है। लोगों में इसकी लत लग गई है। दिन की शुरूआत इसी के साथ होती है। सभी ने अमर उजाला की निष्पक्ष और सकारात्मक खबरों की सराहना की। अखबार में दी गई हर खबर को लोग विश्वसनीय मानते हैं।
गांव में आज भी बुजुर्ग कोई अखबार देखते हैं तो उसे अमर उजाला ही कहते हैं। उनके लिए अखबार का मतलब अमर उजाला है।कर्मचारी चयन आयोग की तैयारी के दौरान मेरे गुरुजी ने नियमित रूप से अमर उजाला पढ़ने का सुझाव दिया था।
- राजपाल सोलंकी, प्रबंधक एमएस पब्लिक स्कूल
- मेरा और मेरे परिवार को अमर उजाला से बेहद लगाव है। मेरी मां राधारानी शर्मा ने अमर उजाला के धूलियागंज कार्यालय में डोरीलाल अग्रवाल जी के साथ चारो वेद स्थापित किए थे। अमर उजाला के 70 वें स्थापना दिवस पर उन्होंने अपने हाथों से पत्र लिखा।
- प्रद्युमभन चतुर्वेदी, प्रबंधक, गायत्री पब्लिक स्कूल
- अमर उजाला हमारी कमजोरी बन गया है। इसको पढ़ने बिना चैन नहीं मिलता। आठ पेज का माई सिटी निकाला जाना अच्छा कदम है। इसमें हर वर्ग की खबरों को समाहित कर लिया गया है।
- डा. सुशील चंद्र गुप्ता, निदेशक, प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल
- अमर उजाला में देश-विदेश के साथ क्षेत्रीय खबरों को पर्याप्त स्थान दिया जाता है। हर वर्ग की खबरें होती हैं। खबरें विश्वसनीय भी होती हैं। यही कारण है कि लोगों का इस अखबार के प्रति जुड़ाव भी अधिक है।
- पुनीत वशिष्ठ, प्रधानाचार्य, जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल
- अमर उजाला हर सवेरे उजाला करता है। घर का कोई भी सदस्य हो, सुबह यही पूछता है कि देखो अमर उजाला आ गया। कोई यह नहीं कहता की अखबार आ गया। लोगों को यह विश्वास भी होता है कि अमर उजाला में जो बात लिखी है सच होगी।
- संजय तोमर, चेयरमैन, होली पब्लिक स्कूल
- कक्षा आठ से अमर उजाला पढ़ना शुरू किया। पढ़ाई में यह अखबार बहुत मददगार साबित हुआ। अमर उजाला बहुत सारी चीजें अच्छी हैं। अखबार में शिक्षा की खबरों के लिए पेज तय है। जॉब अलर्ट में छात्र-छात्राओं के काम की बात होती है।
- डा. भोजकुमार शर्मा, प्रांतीय मंत्री, माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट)
- छोटी कक्षा में मेरी हैंडराइटिंग खराब थी, पिताजी रोजाना अमर उजाला की एक खबर देते थे, उसे लिखने के लिए कहते थे। लिखने की प्रक्रिया में पढ़ने की आदत बन गई। अब जिस दिन अमर उजाला नहीं पढ़ने के लिए मिलता सुकून नहीं मिलता।
- सोमदेव सारस्वत, प्रधानाचार्य, श्री रामकृष्ण इंटर कालेज
- अमर उजाला पढ़े बिना दिन अधूरा लगता है। अमर उजाला में सकारात्मक खबरों को प्रमुखता दी जाती है। इसका असर पाठकों पर पड़ता है। अमर उजाला फाउंडेशन की छात्रवृत्ति वितरण योजना सराहनीय कदम है।
- डा. ब्रजेश रावत, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- गांव में चबूतरे पर अखबार पढ़ा जाता था। हर कोई अमर उजाला पढ़ना चाहता था। कुछ और भी अखबार आते थे, खबरों की विश्वसनीयता के लिए लोग अमर उजाला ही देखते थे। अमर उजाला में खबरें निष्पक्ष होती हैं।
- डा. अनिल वशिष्ठ, प्रधानाचार्य, रत्नमुनि जैन इंटर कालेज
- अमर उजाला से बचपन का नाता है। अमर उजाला में सकारात्मक खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की जाती हैं। वर्ष 1980 में मेरी एक कहानी अमर उजाला में प्रकाशित हुई थी। अमर उजाला से बेहद लगाव है।
- डा. शरदचंद्र उपाध्याय, निदेशक दाऊदयाल संस्थान, डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- मेरे विश्व रिकार्डधारी बनने में अमर उजाला का भी योगदान है। 1988 में जब मैंने कम उम्र में सबसे ज्यादा मरीज देखने का रिकार्ड दर्ज करने के लिए गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड के लिए आवेदन किया तो अखबारों की कटिंग भी मांगी थी। तब अमर उजाला की कटिंग लगाई।
डा. पार्थसारथी शर्मा, वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक
- इसकी निष्पक्षता के चलते मैं अमर उजाला का लती हूं। बिना इसे पढ़े दिन अधूरापन रहता है। कभी घर से बाहर जाना भी पड़े तो सभी पुराने पेपरों को इकट्ठा करने की बोल जाता हूं। वापसी पर उन सभी अखबारों को पड़ता। अब कहीं रहूं, इंटरनेट के जरिये रोजाना अखबार पढ़ने का सिलसिला चल रहा है।
डा. आरएस कपूर, पूर्व अध्यक्ष आईएमए
- अमर उजाला की सबसे बड़ी खासियत निष्पक्षता है। किसी भी मुद्दे पर वह पक्ष-विपक्ष दोनों की बात रखता है। यही वजह है कि पाठक इसमें छपी हर खबर पर पूरी तरह से भरोसा करता है। बिजली, पानी, अतिक्रमण जैसी समस्याओं पर भी खूब कलम चलती है।
डा. अरुण जैन, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ
- अमर उजाला किसी तथ्य को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत नहीं करता। सनसनी बनाने के लिए अनावश्यक नेगेटिव न्यूज नहीं देता। अमर उजाला ही ऐसा अखबार है, जो झोलाछाप के इलाज से मौत होने की घटना को झोलाछाप के साथ डाक्टर लिखकर महिमा मंडन नहीं करता।
डा. आलोक मित्तल, वरिष्ठ ईएनटी रोग विशेषज्ञ
- इमरजेंसी के विरोध में अमर उजाला का संपादकीय पृष्ठ रिक्त था। कई राजनीतिक दबाव के आगे भी अमर उजाला में कलम नहीं रुकी। तब से बना ये भरोसा अभी तक बना हुआ है। मेरी नई पीढ़ी जो विदेशों में है, वह भी इंटरनेट पर अमर उजाला पढ़कर मुझसे शहर-प्रदेश और देश की चर्चा करते हैं।
डा. सुनील शर्मा, वरिष्ठ लेप्रोस्कॉपिक सर्जन
- 1977 में मैंने सीपीएमटी टॉप किया तो डोरीलाल जी ने मुझे दफ्तर में सम्मानित किया और कहा कि तुमने हमारे शहर का नाम रोशन किया है, जो मेरे लिए यादगार है। सामाजिक सरोकार की खबरें प्राथमिकता पर प्रकाशित होती हैं। स्वास्थ्य शिक्षा के प्रति जागरूक करने वाली खबरों को और प्रमुखता देने की जरूरत है।
डा. रविंद्र मोहन पचौरी, अध्यक्ष आईएमए
- निष्पक्षता और सच्चाई तो अमर उजाला की पहचान है। समय के साथ अमर उजाला प्रयोग करने में भी पीछे नहीं है। पहले के मुकाबले अखबार में फोटो की गुणवत्ता में काफी सुधार देखने मिल रहा है। फोटो बड़े-बड़े छप रहे हैं, इनका एंगल भी जानदार है। उम्मीद है कि खबर और फोटो की गुणवत्ता बरकरार रहेगी।
डा. डीवी शर्मा, वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ