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#हिंदीहैंहम : 'हृदय की गहराइयों में बसी हुई है हिंदी, इसे बढ़ावा देना चाहिए'

Thu, 27 Aug 2020 01:33 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
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हिंदी हैं हम - फोटो : अमर उजाला
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हिंदी एक ऐसी भाषा है जो लोगों के हृदय में वास करती है। हिंदी लोगों के हृदय में इतनी गहराई तक बैठ गई है उसे बाहर निकाला नहीं जा सकता है। हिंदी भाषा के उत्थान और विकास के लिए सरकार को और प्रयास करने होंगे। मैनपुरी में बुधवार को महिलाओं ने बेबाकी से अपनी राय हिंदी भाषा के प्रति रखी। 

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सीमा यादव ने कहा कि हिंदी भारत के लोगों के मन और वचन की भाषा है। हिंदी भाषा में जो गुण हैं, वह अन्य किसी भाषा में नहीं मिल सकते। हिंदी लोगों के अंदर उत्पन्न होने वाली भावनाओं की भाषा है। यह हृदय की गहराइयों में अपना स्थान रखती है। इस भाषा के विकास के लिए सरकार को अधिक से अधिक प्रयास करने चाहिए। 


विनीता देवी ने कहा कि हिंदी वह भाषा है जो बिना किसी दबाव के लोगों के दिल और दिमाग पर अपना प्रभाव बनाती है। ऐसी भाषा के विकास के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए। हिंदी की उन्नति पर ही भारतीय संस्कृति की उन्नति संभव है। शासन और प्रशासन को भी नीति बनानी चाहिए। 

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'मातृभाषा हिंदी पर अभिमान'

प्रीती देवी ने कहा कि हम सभी भारतवासियों को अपनी मातृभाषा हिंदी पर अभिमान है। हिंदी युगों से मानव को मानवता का संदेश देती आई है। मानव के हृदय में बिना कुछ कहे ही यह भाषा भावनाओं के रूप में निवास करती है। हिंदी के गीत और कहानियां वर्षों से लोगों को मानवता का संदेश देते आए हैं। 

बीना कुमारी ने कहाकि अन्य किसी भाषा में इतना रस नहीं है जितना रस हिंदी में है। प्राचीन कवि और साहित्यकारों ने हिंदी के माध्यम से जो संदेश दुनियां को दे दिए हैं वह संदेश आज भी देश की उन्नति और विकास में सहायक हैं। हिंदी के विकास के लिए प्रधानमंत्री को और भी प्रयास करने होंगे। हिंदी के बिना धर्म का विकास संभव नहीं है। 

कुसुम देवी ने कहा कि हिंदी हमारी मातृ भाषा है। भारत के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह इसका सम्मान करे। क्षेत्रीय भाषाओं के साथ ही हमें हिंदी को बढ़ावा देना चाहिए।
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