किसी भी राष्ट्र की एकता के लिए उसकी एक भाषा का होना अनिवार्य माना गया है। भारत में यह भूमिका हिंदी निभा रही है। हिंदी न सिर्फ भाषा बल्कि देश की आत्मा की झंकार है। यह विविधताओं के बीच देश को एक सूत्र में पिरोती है। समाज के हर वर्ग को समता का अहसास भी कराती है। यह कहना है मथुरा के हिंदी भाषा विशेषज्ञों का।
केआर डिग्री कॉलेज के हिंदी विभागाध्याक्ष रह चुके डॉ. रमाशंकर पांडेय का कहना है कि हिंदी भारत में संवाद की भाषा है। लगभग पूरा भारत में यह भाषा बोली या समझती जाती है। केवल हिंदी भाषी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि अहिंदी भाषी प्रांतों में भी यह बोली और समझी जाती है। विभिन्न अहिंदी भाषी प्रांतों को भी यह संवाद का सेतु प्रदान करती है।
हम कह सकते हैं कि हिंदी भारत में एकता की कड़ी है। किसी भी राष्ट्र की एकता के लिए उसकी एक भाषा का होना अनिवार्य माना गया है। भारत में यह भूमिका हिंदी निभा रही है। स्वाधीनता के बाद यह राजभाषा बनी यह इसकी उपयोगिता को प्रमाणित करता है। हिंदी भारत की आत्मा की झंकार है, इसमें हमारी सभ्यता और संस्कृति प्रतिबिंबित होती है।