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अमर उजाला स्थापना दिवस विशेष: समय के साथ नई तकनीक के साथ ही पुलिस की बदली कार्यप्रणाली, साइबर व महिला अपराध पर अंकुश की रही कवायद 

Mon, 18 Apr 2022 01:15 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

आगरा में पिछले कुछ वर्षों में जहां साइबर अपराध के मामलों में वृद्धि हुई है, वहीं मानव तस्करी के मामले भी सामने आ चुके हैं। पॉश इलाकों को चोर-लुटेरे निशाना बनाते हैं। इसको देखते हुए तीन नए थाने खोले गए। पुलिस ने नई तकनीक के साथ ही अपनी कार्यप्रणाली भी बदली है। इसका असर भी नजर आने लगा है।
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आगरा में रेंज साइबर सेल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा रेंज में चार जिले आते हैं। आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा और मैनपुरी। इन जिलों में साइबर अपराध के मामले में पीड़ितों को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए भटकना पड़ता था। आगरा में रेंज साइबर सेल बनी थी। जिला साइबर सेल में जिले के ही मामले सुने जाते थे। रेंज साइबर सेल में उपकरण से लेकर कर्मचारियों की कमी होने के कारण साइबर अपराध पर अंकुश नहीं लग पा रहा था। मार्च 2020 में पुलिस लाइन में रेंज साइबर क्राइम थाना स्थापित किया गया। इसका उद्घाटन ततकालीन एडीजी अजय आनंद और आईजी रेंज ए सतीश गणेश ने किया।  

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इस थाने में प्रभारी निरीक्षक से लेकर दरोगा और सिपाही तैनात किए गए। इनमें कंप्यूटर के जानकार से लेकर अपराधियों की धरपकड़ में माहिर कर्मचारी शामिल थे। अब पीड़ित लोगों को एक लाख से अधिक के आर्थिक अपराध के मामले में भटकना नहीं पड़ता है। उनकी शिकायत पर सीधे मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई की जाती है। 

थाना नंबर दो  कमला नगर थाना

कमला नगर शहर के पॉश इलाके में से एक है। कालोनी में सामान्य वर्ग से लेकर व्यापारी, उद्यमी, शिक्षक, कालेज संचालक आदि रहते हैं। इलाके में बड़ी लूट और हत्या की वारदात से लेकर चोरी की वारदात आम बात है। व्यापारी वर्ग सालों से सुरक्षा की दृष्टि से थाना की मांग करता आ रहा था। यहां पर पूर्व में थाना न्यू आगरा की बल्केश्वर पुलिस चौकी ही हुआ करती थी। थाना का क्षेत्र बड़ा होने की वजह से ठीक से पेट्रोलिंग नहीं हो पा रही थी। दो दशक से लोगों की मांग पर शासन को प्रस्ताव भेजा गया। अगस्त 2020 में कमला नगर थाना बना था। इसके पहले निरीक्षक नरेंद्र शर्मा बने। 40 दिन में बल्केश्वर चौकी को थाना का रूप दिया गया था। हालाकि थाने के उद्घाटन के चंद दिन बाद ही इलाके में व्यापारी की हत्या और लूट की घटना हुई। इसके बाद पेट्रोलिंग बढ़ाई गई। थाना खुलने पर क्षेत्रीय लोगों ने खुशी जाहिर की। उन्हें अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए दूर भी नहीं भागन पड़ता है।

थाना नंबर तीन : मानव तस्करी निरोधक थाना

ताजनगरी में मानव तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। बाल भिक्षावृत्ति भी होती है। इसके अलावा लड़कियों के अपहरण के मामले सामने आते हैं। पुलिस लाइन में पहले मानव तस्करी निरोधक शाखा हुआ करती थी। नवंबर 2020 में तत्कालीन एसएसपी बबलू कुमार ने शाखा की जगह थाना स्थापित कराया। इसके लिए पुलिस लाइन में रेंज साइबर थाना के बराबर में एंटी हृयूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना (मानव तस्करी निरोधक थाना) खोला गया। इसमें निरीक्षक के तौर पर कमर सुल्तान को प्रभारी बनाया गया। दस पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया। इस थाने की प्रभारी को ही परिवार परामर्श केंद्र और एंटी रोमियो स्क्वैड की जिम्मेदारी दी गई। अब देह व्यापार के मामले में थाने के सहयोग से पुलिस टीम कार्रवाई करती है। पति-पत्नी के बीच के झगड़ों को निपटाने के लिए काउंसिलिंग भी हो रही है।

अब हो गए 45 थाने

आगरा में पूर्व में 42 थाने थे, जिनमें से शहर में 15 और एक महिला थाना हुआ करता था। इसी तरह देहात में 25 थाने हुआ करते थे। एक थाना पर्यटन था। अब तीन नए कमला नगर, रेंज साइबर क्राइम और एंटी हृयूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना बनने से थानों की संख्या 45 हो गई है।
 

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 पुलिसकर्मियों को मिला प्रशिक्षण

साइबर अपराध के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए पुलिस पूरी तरह से तैयार नहीं थी। थाने और साइबर सेल तो खुल गईं, लेकिन थानों में पीड़ितों को चक्कर काटने पड़ते हैं। इससे निजात दिलाने के लिए एडीजी जोन राजीव कृष्ण ने रूपरेखा तैयार की। साइबर क्राइम इन्वेस्टीगेशन आफिसर के रूप में तैयार करने को आनलाइन ट्रेनिंग शुरू की गई। इसमें पुलिसकर्मियों को डिजीटल इनवेस्टीगेशन के साथ-साथ साइबर अपराध के बारे में जानकारी दी गई। हर थाने के दो सिपाही और एसआई को ट्रेनिंग दी गई। पुलिसकर्मियों को फाइनेंसियल फ्रॉड, इंटरनेट मीडिया क्राइम, डिजीटल सांक्ष्यों को जुटाने सहित अन्य विषयों की जानकारी दी। पहले चरण में 824 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल किए गए।  इसके बाद आम लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। आनलाइन लोगों को जोड़ा गया। इसके बाद एक्सपर्ट ने साइबर अपराध से बचने के बारे में बताया। इसका असर यह हुआ कि हर थाने में पीड़ितों की शिकायतों को एक्सपर्ट पुलिसकर्मी सुनने लगे। वर्ष 2020 में साइबर अपराध के आठ हजार मामले सामने आए थे। 


लोगों कों जागरूक करता है अखबार

एडीजी आगरा जोन राजीव कृष्ण ने कहा कि 'मैं अमर उजाला को कई वर्षों से लगातार पढ़ रहा हूं। इसमें निष्पक्ष पत्रकारिता का विशेष ख्याल रखा जाता है। समाज के हर वर्ग से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाता है। अमर उजाला में प्रकाशित समाचारों से जहां एक ओर समस्त छोटी बड़ी खबरें प्राप्त होती हैं, वहीं दूसरी ओर इससे नागरिकों में जागरूकता पैदा होती है। मेरी ओर से अमर उजाला के स्थापना दिवस के अवसर पर बहुत बहुत शुभकामनाएं।'

तथ्यों पर आधारित होती हैं खबरें

 पुलिस महानिरीक्षक नचिकेता झा ने कहा कि 'दैनिक अमर उजाला में प्रकाशित समाचारों और लेखों का यथार्थ तथ्यों पर आधारित होने के कारण प्रिंट मीडिया एवं जन सामान्य के हृदय में अपना एक विशिष्ट स्थान है। मैं भी अमर उजाला में प्रकाशित निष्पक्ष एवं प्रभावशाली समाचारों के कारण इसका नियमित पाठक हूं। मैं अमर उजाला परिवार और उनके सुधि पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।'


बेहद सरल और सुबोध है भाषा

एसएसपी आगरा सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि  'मैं विगत कई वर्ष से हिंदी समाचार पत्र अमर उजाला पढ़ता आ रहा हूं। समाचार पत्र की भाषा बेहद सरल और सुबोध रहती है। साथ ही समाचार शीर्षक सारगर्भित होता है। इसके कई संपादकीय लेखों ने मेरे जीवन में गहरी छाप छोड़ी है। ताकतवरों को सच का आइना दिखाने की कसौटी पर अमर उजाला खरा उतरता है।' , 


छात्र जीवन से पढ़ रहीं अमर उजाला

स्टाफ अफसर एडीजी जोन मनीषा सिंह का कहना है कि 'अमर उजाला चौथे स्तंभ के रूप में एक जाना माना समाचार पत्र है, जिसने समय-समय पर खबरों के साथ-साथ जन सरोकार के मुद्दों को भी प्रमुखता से खबरों में प्रकाशित किया है। छात्र जीवन से ही मैं अमर उजाला की नियमित पाठक रही हूं। पुलिस सेवा में आने के बाद अमर उजाला द्वारा संचालित किए जाने वाले महिला सशक्तीकरण एवं जागरूकता वाले कार्यक्रम जैसे ‘अपराजिता’ ‘पुलिस की पाठशाला’ आदि में प्रतिभाग किया है। इनके माध्यम से छात्राएं एवं महिलाएं काफी जागरूक एवं सशक्त हुई हैं। साथ ही रूपायन, कच्ची धूप और प्रवाह पेज से आम जन लाभान्वित हुए हैं।' 

देश और दुनिया की खबरें साथ-साथ

सीओ हरीपर्वत  सत्य नरायण ने बताया कि 'कई वर्ष से अमर उजाला पढ़ता आ रहा हूं। सुबह की चाय के साथ अमर उजाला हाथ में होता है। एक अखबार में देश दुनिया की खबरें मिल जाती है। इसके साथ माई सिटी में स्थानीय खबरें मिल जाती है।  अमर उजाला जो आवाज उठाता है, उसे फीडबैक की तरह लिया जाता है। पुलिसिंग में और कवायद होती है। अमर उजाला के माध्यम जनता तक पुलिस अपनी बात पहुंचाती है।'

दिनचर्या का अभिन्न अंग है अमर उजाला

सीओ लोहामंडी अर्चना सिंह ने बताया कि 'अमर उजाला समाचार पत्र हमारी दिनचर्या का अभिन्न अंग बन चुका है। महिलाएं सुबह की शुरुआत अमर उजाला के साथ ही करती हैँ। माय सिटी अंक मुझे विशेष रूप से पसंद है। महिलाओं और बच्चों से संबंधित सभी लेख बहुत ही गहन और विस्तृत होते हैं। इन्हें में निश्चित रूप से पढ़ती हूं। संपादकीय लेख से भी उच्च कोटि का ज्ञानवर्धक होता है।'
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