कोरोना के दौर में लॉकडाउन का असर आम से लेकर खास लोगों के साथ ही बच्चों पर भी पड़ा था। दो वर्षों तक दोस्तों-शिक्षकों से दूर रहने के चलते बच्चों में चिड़चिड़ापन आ गया, वह अवसाद के शिकार होने लगे। जब तीसरी लहर के बाद विद्यालय खुले तो बच्चों के चिड़चिड़ेपन की आदतों से शिक्षकों को भी जूझना पड़ा। शिक्षकों ने अतिरिक्त समय देकर बच्चों का अवसाद दूर करने में कामयाबी हासिल की।
एमजी कॉन्वेंट स्कूल शिकोहाबाद रोड के प्रबंधक राहुल गुप्त बताते हैं कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प दिया गया था, लेकिन कुछ बच्चों के अभिभावकों के पास स्मार्टफोन नहीं थे, जिसकी वजह से ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो सकी और बच्चों की पढ़ाई पिछड़ गई। इधर एक दिन में सात घंटे विद्यालय में पढ़ते थे, कोरोना काल में उनको पढ़ाई का ऑफलाइन कोई मौका नहीं मिला था। इसकी वजह से चिड़चिड़ापन आ गया। विद्यालय में अतिरिक्त समय देकर शिक्षकों ने पढ़ाई कराई, तब जाकर बच्चों में कुशलता देखने को मिल रही है।
ये कहते हैं शिक्षक
बच्चे दो वर्ष से अधिक समय तक ऑनलाइन पढ़ाई पर निर्भर रहे। ऑफलाइन पढ़ाई का मौका न मिलने से पढ़ाई में अस्थिरता आई। विद्यालय खुलने पर सुधार है। ब्यूटी, शिक्षिका, एमजजी कॉन्वेंट स्कूल
कोरोना काल सभी ने देखा है, परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई थीं। इसकी वजह से बच्चों की पढ़ाई पर बहुत असर पड़ा। अब काफी हद तक सुधार हो गया है। - रीतू मिश्रा, शिक्षिका, एमजी कान्वेंट स्कूल
ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान अभिभावकों की ओर से काफी सहयोग मिला। फिर भी पढ़ाई ऑफलाइन जैसी नहीं हो सकी थी। विद्यालय खुलने के बाद सुधार आया। - तन्वी गुप्ता, छात्रा, कक्षा छह
कोरोना के दौरान लॉकडाउन में पढ़ाई को लेकर बहुत चिंता रहती थी। विद्यालय में फोन करके भी मदद लेते रहे। जबसे विद्यालय खुले हैं, तबसे पढ़ाई सही हो गई है। विद्यादर्शिनी, छात्रा, कक्षा-10